हाईकोर्ट ने कहा कि गैर सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान संबंधित प्रोफेशनल कोर्स में खुद ही सीधे एडमिशन नहीं दे सकते। प्रदेश सरकार ने मई 2017 और अन्य शासनादेशों के तहत 50 प्रतिशत सीटों पर दाखिले के लिए केंद्रीयकृत एडमिशन व्यवस्था शुरू की है, जो सिंगल विंडो सिस्टम जैसा है। इसके जरिए सभी प्रकार के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में एडमिशन दिए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि साल 2006 में प्रदेश सरकार ने उप्र प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशन इंस्टीट्यूशन (रेग्यूलेशन ऑफ एडमिशन एंड फिक्सेशन ऑफ फीस) एक्ट बनाया था। इसी के तहत सरकार ने केंद्रीयकृत प्रवेश के लिए शासनादेश जारी किया। यह एक्ट अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए ऐसा करने से सरकार को नहीं रोकता।
कॉमन एडमिशन टेस्ट जरूरी भी
हाईकोर्ट ने साफ किया कि सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम बनाने का न केवल अधिकार है, बल्कि यह जरूरी भी है। अगर सरकार इसके तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए किसी एजेंसी के जरिए केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा करवाती है, तो ये सभी संस्थान अपने आप इसके अधीन आ जाएंगे। इसी के जरिए पात्र विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा।
इसमें अपवाद केवल वह संस्थान होगा जो अपने क्षेत्र की बेहद विशिष्ट शिक्षा देने वाला अकेला संस्थान होगा, लेकिन ऐसे संस्थान की प्रवेश नीति भी सरकार के नियमों के विपरीत नहीं हो सकती। वहीं अगर प्रदेश सरकार ऐसी कोई परीक्षा नहीं करवाती है तो अल्पसंख्यक संस्थानों को मिलकर ऐसी परीक्षा करवानी होती है।