सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने तर्क दिया कि एकल न्यायाधीश ने सिर्फ पांच सवालों को विवादास्पद बताते हुए चर्चा की। इसके बावजूद पूरी अस्थायी उत्तर कुंजी को आपत्तियों के साथ यूजीसी के विशेषज्ञों की समिति को भेजकर रिपोर्ट मांगी है। जबकि यह किसी याचिका में नहीं था।
महाधिवक्ता ने कहा, एकल न्यायाधीश ने याचिकाओं में मांगी गई राहत से परे जाकर आदेश दिए हैं। ऐसे में 3 जून का आदेश कानून की नजर में ठहरने लायक नहीं है। वहीं, इससे खाली पदों के भरने में देरी होगी, जो व्यापक जनहित में नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से इस आदेश के अमल पर रोक लगाने का अनुरोध किया।
उधर, याची व पक्षकारों के वकील डॉ. एलपी मिश्र, जेएन माथुर, एचजीएस परिहार व अन्य ने अपीलों का विरोध किया और इनके सुनवाई लायक होने के बिंदुओं पर आपत्ति की। साथ ही, आपत्ति दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय दिए जाने का अनुरोध किया।