इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से चीनी के स्टॉक बेचकर किसानों को भुगतान के 800 करोड़ रुपये हरहाल में 31 अक्टूबर तक मिल जाएंगे। पिछले आदेश में अदालत ने 15 फीसदी स्टॉक बेचकर उससे मिलने वाली रकम का 30 प्रतिशत किसानों को देने को कहा था।
मिली रकम का 70 फीसदी संबंधित जिलों के कलेक्टर के खाते में जमा करा दी गई थी जो कि 800 करोड़ रुपये है। किसान नेता वीएम सिंह का कहना है कि अदालत ने किसानों का भुगतान पहले किए जाने को कहा है इससे यह रकम भी किसानों के बकाया भुगतान में दी जा सकेगी।
किसानों का पूरा भुगतान हो जाने के बाद ही बचे हुए स्टॉक से बैंकों को भुगतान होगा। जिन चीनी मिलों ने बैंकों से 85 प्रतिशत एडवांस लिया था उनको चीनी का बचा हुआ स्टॉक बेचकर बैंकों को भुगतान करना होगा।
डीएम की जांच में एडवांस के एवज में बैंक के पास बंधक रखी गई चीनी यानी टैगिंग ऑर्डर का भी सही-सही पता चल सकेगा।
बैंकों को हक मिलता तो नहीं बिकती चीनी
हाईकोर्ट के फैसले पर संतोष जाहिर करते हुए वीएम सिंह ने कहा कि यदि कोर्ट ने भुगतान पर पहला हक बैंकों का माना होता तो मिलें शायद एक बोरा चीनी भी न बेचतीं।
हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में माना है कि मिलों ने उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति एवं विनियमन अधिनियम की धारा 17(5)) का उल्लंघन किया है जिसके अनुसार बैंक से एडवांस ली गई रकम का उपयोग सिर्फ किसानों को गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए ही किया जा सकता है।
तीन दिन लगातार चली सुनवाई
गन्ना किसानों के भुगतान के प्रकरण को हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया। इसका पता इसी बात से चलता है कि राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बुधवार को लंच के बाद सुनवाई प्रारंभ की।
बृहस्पतिवार को इस पर पूरे दिन सुनवाई हुई। शुक्रवार को खंडपीठ ने खुली अदालत में फैसला लिखाया और लंच के बाद प्रस्तावित पूर्णपीठ को रद्द करते हुए फैसला सुनाया।
मवाना मिल की याचिका खारिज
किसानों को भुगतान नहीं करने और बैंक से लिए गए एडवांस का उपयोग दूसरे काम में करने के मामले में गिरफ्तारी से बचने की मवाना शुगर मिल की याचिका अदालत ने खारिज कर दी है।
मवाना शुगर मिल पर प्रदेश सरकार ने मुकदमा दर्ज किया है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मिल ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। उस पर करीब 600 करोड़ रुपये किसानों का बकाया है।
गन्ना सोसाइटी के वकील रवींद्र सिंह के मुताबिक इसके साथ ही कोर्ट ने कई मिलों का कलेक्शन चार्ज पर रोक लगाते हुए सोसाइटी के बकाया कमीशन का भुगतान करने का निर्देश दिया है।