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धमाके के साथ ढही इमारत, 25 मजदूर दबे

Sat, 06 Sep 2014 01:20 AM IST
विवेक त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
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बीकेटी में शुक्रवार रात बायोटेक नेटवर्किंग फेसिलिटी सेंटर के निर्माणाधीन भवन का लिंटर ढह गया। मौके पर काम कर रहे 25 मजदूर मलबे में दब गए।
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उनकी चीख-पुकार से इलाका दहल गया। सूचना पाकर पहुंची बीकेटी पुलिस ने मलबा हटवाकर दबे हुए मजदूरों को बाहर निकलवा कर अस्पताल भेजा।

एएसपी ग्रामीण हबीबुल हसन ने घटिया निर्माण कार्य सामग्री इस्तेमाल किए जाने के चलते हादसे की आशंका जताई है। एएसपी ग्रामीण ने बताया कि हादसा रात करीब 11.30 बजे हुआ। भवन की छत का लिंटर डालने के लिए 55 मजदूर लगे थे।

अचानक तेज धमाके के साथ लिंटर ढह गया। कई मजदूर दब गए। मौके पर धूल का गुबार छा गया। चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा।

हालत खतरे से बाहर

मजदूरों से सूचना पाकर बीकेटी एसओ राम प्रसाद यादव और सीओ जेके सिंह फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे और मलबा हटवाने का काम शुरू किया। एएसपी ग्रामीण ने बताया कि सात मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

हादसे के बाद दहशत के चलते कई मजदूर भाग गए जिससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि मलबे के नीचे कितने लोग दबे हो सकते हैं। एएसपी ग्रामीण ने बताया कि फायर ब्रिगेड व आपदा प्रबंधन टीम को मौके पर बुलवा लिया गया है।

देर रात तक मलबा हटाने का काम चल रहा था। घायल मजदूरों को बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

तहसील रोड पर डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की तरफ से समाज कल्याण विभाग का ठेकेदार इस सेंटर का निर्माण करा रहा है। एएसपी ग्रामीण का कहना है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल के चलते हादसा होने की आशंका जताई जा रही है।
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ठेकेदार फरार, भटक रहे मजदूरों के परिवारीजन

पुलिस ने बताया कि हादसा होते ही निर्माण कार्य करा रहा ठेकेदार व उसके आदमी मौके से फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक ज्यादातर मजदूर सीतापुर के हैं और इन्हें इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा पर लेबर अड्डे से लाया गया था।

यह मजदूर हुए घायल
सीतापुर निवासी श्रीधर, सरवन, बलराम, गोविंद, सतीश, पप्पू, बदलू और मड़ियांव का सुरेश गंभीर रूप से घायल हैं जबकि भल्लर, सुनील, महेश, शकील, मिश्रीलाल, गोलू, श्यामू, रामपाल, आजाद, छोटेलाल, राकेश और विजय सहित कई को चोटें आईं।

सीएचसी बीकेटी में इलाज में लापरवाही
घायल मजदूरों को पहले बीकेटी सीएचसी ले जाया गया लेकिन यहां कोई व्यवस्था नहीं थी। कई मजदूरों के पहुंचने से सीएचसी में अफरा-तफरी मच गई। मजदूरों को फर्श पर लिटा दिया गया लेकिन एक डॉक्टर और दो कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिए। काफी देर मजदूर तड़पते रहे। इसके बाद इन्हें बलरामपुर अस्पताल भेजा गया।
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