विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली पर सख्त ऐतराज जताते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा कि आज तक ऐसी कोई कार्य संस्कृति विकसित नहीं हो पाई है, जिससे आम जनता की दिक्कतों को आसानी से दूर किया जा सके।
प्राधिकरण नियम कानून ताक पर रखकर आवंटियों को इस पटल से उस पटल पर दौड़ाते रहते हैं। उनके गैरजिम्मेदार और संवेदनहीन रवैये से आवंटियों को न केवल वित्तीय बल्कि तमाम मानसिक तकलीफों से गुजरना पड़ता है।