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यूपीः बिना परीक्षा होने वाली कांस्टेबल भर्ती पर मंडराया खतरा

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यूपी में बिना परीक्षा कराए पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती कराने की सरकार की नई नीति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका दाखिल कर सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई है।
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मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदेश सरकार को इस मामले में चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। पूछा है कि पहले से चली आ रही भर्ती प्रक्रिया में संशोधन कर नया नियम बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

मामले की गंभीरता के मद्देनजर कोर्ट ने महाधिवक्ता को भी नोटिस जारी कर सरकार का पक्ष रखने का निर्देश दिया है। रणविजय सिंह और कई अन्य याचिका दाखिल कर कहा है कि पुलिस विभाग में सिपाही का पद बेहद महत्वपूर्ण है।
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यूपी सरकार ने पुलिस भर्ती के नियमों में किया था संशोधन

इस पद पर भर्ती के लिए अभ्यर्थी की योग्यता का विधिवत परीक्षण कर चयन करना आवश्यक है। पूर्व में भर्ती के लिए लिखित परीक्षा, रीजनिंग टेस्ट, मानसिक योग्यता और शारीरिक दक्षता, साक्षात्कार आदि कई चरणों में परीक्षा लेकर चयन का नियम है।

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में इस नियम को संशोधित करते हुए नया नियम बना दिया है। अब सिपाहियों की भर्ती मात्र उनके हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्राप्तांक के आधार पर तैयार मेरिट से होगी।

शारीरिक दक्षता के नाम पर साढ़े चार किलोमीटर दौड़ भी होगी। इससे व्यापक पैमाने पर धांधली की आशंका है तथा योग्य अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सकेगा। याचिका में संशोधित नियमावली को रद्द करने की मांग की गई है। इस मामले में चार सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।
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