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मोटी गर्दन से हैं परेशान तो कराएं टेस्ट, हो सकते हैं इस बीमारी के संकेत

Tue, 28 Aug 2018 02:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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गर्दन की बढ़ती मोटाई शरीर में यूरिक एसिड की बढ़ी हुई मात्रा का लक्षण हो सकती है। यह तथ्य सामने आया केजीएमयू के फिजियोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग की ओर से की गई शोध में।
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शोध में पाया गया कि जिन मरीजों के शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ी हुई थी, उनके गर्दन की मोटाई सामान्य लोगों से करीब 1.07 सेमी तक अधिक है, जबकि जिनके शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा सामान्य से कम थी, उनकी गर्दन की मोटाई सामान्य से 2.55 सेमी तक कम पाई गई।

नेक सर्कमफेरेंस यानी गर्दन की मोटाई यूरिक एसिड लेवल और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के लिए एक नॉवेल मार्कर है।  अगर गर्दन की मोटाई बढ़ने लगे तो यह हाइपरयूरिसीमिया यानी हाई यूरिक एसिड का संकेत हो सकता है। 
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सीरम यूरिक एसिड लेवल    गर्दन की मोटाई (औसत)
हाइपरयूरिसीमिया                       38.42
नॉर्मल                                         37.35
बिलो नॉर्मल                                34.80
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शोध में ये विशेषज्ञ रहे शामिल

- फोटो : डेमो
यह शोध करीब पांच माह की अवधि में इलाज के लिए केजीएमयू आने वाले 160 लोगों पर किया गया। इसमें 18 से 60 की आयु वर्ग के 62.5 प्रतिशत पुरुष व 37.5 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं।

शोध में पांच साल से अधिक समय के डायबिटीज व हाइपरटेंशन मरीज और एनाटॉमिकल डिफॉर्मिटी वाले मरीजों को शामिल नहीं किया गया था। शोध में शामिल किए गए लोगों में ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल, फास्टिंग प्लाज्मा ग्लुकोज व यूरिक एसिड के लेवल को भी माप लिया गया था।

सिरम यूरिक एसिड का बढ़ा स्तर कई गंभीर बीमारियों की जड़ है। गर्दन की मोटाई (नेक सर्कमफेरेंस) को अपर बॉडी फैट डिस्ट्रिब्यूशन के इंडेक्स के तौर पर माना जाता है। अपर बॉडी फैट बढ़ने से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की आशंका भी बढ़ जाती है।

यही वजह है कि यूरिक एसिड का बढ़ा स्तर कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की आशंका बढ़ा देता है। इसके अलावा इससे गठिया के मरीजों में भी हड्डियों के दर्द को और बढ़ाता है। 

इस शोध में केजीएमयू के फिजियोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग के कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसमें डॉ. नरसिंह वर्मा, डॉ. अंकिता चतुर्वेदी, डॉ. सुनीता तिवारी, डॉ. जगदीश नारायण, डॉ. अरविंद कुमार वाल व डॉ. नीना श्रीवास्तव शामिल थीं।

 
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