प्रदेश में सामने आए 16.56 करोड़ रुपये के कृषि बीज घोटाले की जांच उच्चस्तरीय एजेंसी से कराए जाने की सिफारिश की गई है। इस मामले में की जांच रिपोर्ट विशेष सचिव, कृषि की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने शासन को सौंप दी है।
कृषि विभाग बीज विकास निगम से बीज खरीदकर किसानों को रियायती दरों पर मुहैया कराता है। इसी क्रम में वर्ष 2011-12 से 2018-19 के बीच 16.56 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान पकड़ में आया। खास बात यह थी कि ये सभी रसीदें महज दो सीरीज ‘9080’ और ‘7188’ की ही निकलीं।
यह ‘कागजी आपूर्ति’ बीज विकास निगम के कानपुर स्टोर से इटावा जिले के लिए दिखाई गई थी। इस घपले को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उजागर किया। इस पर बीज विकास निगम के अधिकारियों ने कार्रवाई से घबराकर वर्ष 2018-19 में किए गए घपले की रकम 99 लाख रुपये गुपचुप ढंग से सरकारी खाते में जमा करा दी।
मामले में कानपुर के कल्याणपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। कानपुर स्टोर से संबंधित कई छोटे कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया गया, लेकिन इतना बड़ा घपला बिना उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के नहीं हो सकता था। इसलिए शासन ने विशेष सचिव, कृषि की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी को की जांच सौंपी।