हाईकोर्ट 2018-19 में आयोजित होने वाले अर्द्धकुंभ मेले के कार्यों की स्वयं मॉनिटरिंग करेगा।
मेले के आयोजन को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि सरकार अगली तारीख पर अपनी योजना का खाका प्रस्तुत करे।
याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट को बताया के मुख्यमंत्री ने हाल में अर्द्धकुंभ के लिए करोड़ों रुपये की परियोजना की शुरूआत और शिलान्यास किया है।
कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर वह देख्रेगी कि छह सप्ताह में कितना कार्य कराया गया है। श्रीकांत त्रिपाठी की जनहित याचिका पर अधिवक्ता एके पांडेय और रामानंद पांडेय ने कोर्ट को बताया कि अगले वर्ष अर्द्धकुंभ मेला होना है।
सरकार के पास तैयार के लिए मुश्किल से एक वर्ष का समय है। इतने कम समय में कार्य पूरा हो पाने में संदेह है जबकि अभी तक कोई भी परियोजना बाकायदा शुरू भी नहीं हुई है।
सरकार करोड़ों रुपये का बजट तो मुक्त कर चुकी है मगर मौके पर काम प्रारंभ नहीं हुआ है। ऐसे में तय समय में काम पूरा हो पाने में संदेह है। ऐन वक्त पर जल्दी-जल्दी कराए जाने वाले काम सिर्फ खानापूर्ति ही साबित होते हैं।
अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के कार्यों की आधारशिला रख दी है।
इस पर काम भी शुरू हो गया है और इसे मेले से पूर्व पूरा करा लिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि छह सप्ताह में कराए गए कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करें वह स्वयं इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।