भाजपा-बसपा नेताओं की बदजुबानी पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा-बोलने की आजादी के अधिकार की सीमाएं क्या होनी चाहिए, यह हम तय करेंगे।
अदालत ने कहा-राजनीतिक बयानबाजी अलग चीज है, पर जैसी भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, उसको देखते हुए बोलने की आजादी के अधिकार की सीमाएं तय की जाएंगी, जो एक सभ्य लोकतांत्रिक समाज के लिए उपयुक्त हों।
न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी की खंडपीठ ने इस मामले में दायर एक पीआईएल पर सुनवाई के दौरान खुली अदालत में बुधवार को यह मौखिक टिप्पणी की। अदालत ने इस मुद्दे पर बहस के लिए अवध बार के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को आमंत्रित किया है।