लखनऊ। राजधानी से करीब 11 महीने पहले गुम हुए व्यक्ति को अभी तक ढूंढ न पाने पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अपर मुख्य सचिव गृह को तीन सप्ताह में निजी हलफनामे पर गुमशुदा की तलाश में हुई प्रगति का ब्योरा पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही चेतावनी दी कि निजी हलफनामा न दाखिल होने पर उन्हें खुद अदालत में पेश होना होगा। अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।
न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ ने यह आदेश सैरून निशा की याचिका पर दिया। इसमें 22 अप्रैल 2025 को गुम हुए व्यक्ति का मुद्दा उठाया गया है। घटना के अगले दिन 23 अप्रैल को एफआईआर करवाई गई थी। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने कहा था कि यह अनोखी बात है जब शहर की प्रमुख सड़कों, चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, फिर भी गुमशुदा की तलाश नहीं की जा सकी है।
मामले को गंभीर करार देकर कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से जवाब मांगा था। 17 मार्च को अपर मुख्य सचिव का निजी जवाबी हलफनामा दाखिल कर सरकारी वकील ने बताया कि गुमशुदा की तलाश की जा रही है।
12 फरवरी को भी अपर मुख्य सचिव गृह का हलफनामा दाखिल किया गया था। इसमें कहा गया था कि पांच फरवरी को एसीपी की अध्यक्षता वाली आठ पुलिसकर्मियों की टीम बना दी गई है। सरकारी वकील ने भी बताया था कि डीसीपी (पश्चिमी) को नियमित अपडेट दिए जाएंगे।