लखनऊ। हाईकोर्ट ने खुर्रमनगर में अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के आदेश का अनुपालन न होने पर सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में एकलपीठ ने अपील के निस्तारण तक ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी थी। दो सदस्यीय खंडपीठ ने इस पर आश्चर्य जताते हुए एकलपीठ के समक्ष दाखिल याचिका का रिकॉर्ड तलब किया है। खंडपीठ ने कहा कि हम देखना चाहते हैं कि आखिर मामले में ऐसी क्या तात्कालिकता थी कि जिस दिन एकलपीठ के समक्ष याचिका दाखिल हुई, उसी दिन उसकी सुनवाई भी हो गई। अगली सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश हेमंत कुमार मिश्रा की ओर से वर्ष 2016 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। याचिका में कहा गया है कि 10 मई 2016 को सक्षम अधिकारी ने अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। मगर अवैध निर्माण को और विस्तार देते हुए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बना लिया गया।
एलडीए के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 2016 के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद बिल्डर्स ने कंपाउंडिंग प्रार्थना पत्र दिया था। इसे निरस्त करते हुए 2022 में नया ध्वस्तीकरण आदेश पारित किया गया। कोर्ट के बीते 13 अगस्त के आदेश के बाद एलडीए कोई कार्रवाई करता, इसके पहले ही 11 सितंबर को बिल्डर फारुक सिद्दीकी व एक अन्य की याचिका दायर हुई। इस पर एलडीए चेयरमैन के समक्ष ध्वस्तीकरण के विरुद्ध दाखिल अपील के निस्तारण तक कार्रवाई पर एकलपीठ ने रोक लगा दी। यह भी कहा कि फारुक सिद्दीकी व एक अन्य की यह याचिका जिस दिन दाखिल हुई, उसी दिन याचियों की तात्कालिकता (अरजेंसी) के अनुरोध पर इसकी सुनवाई भी हो गई।्र
इस पर, दो सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि ध्वस्तीकरण का आदेश पारित हुए तीन साल बीत चुके थे। ऐसे में मामले में क्या तात्कालिकता थी कि उसी दिन याचिका पर सुनवाई हो गई। यह भी एक बहस का विषय है कि यह याचिका एकल पीठ के समक्ष पोषणीय कैसे थी। वहीं, कोर्ट ने मामले के जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के अपने पिछले आदेश के अनुपालन की जानकारी भी एलडीए के वीसी से मांगी है। कोर्ट ने वीसी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अगली सुनवाई के दौरान उपस्थित होने का भी आदेश दिया है।