हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अर्जुनगंज फायरिंग रेंज की जमीन पर अवैध कब्जों को गंभीर मानते हुए एलडीए और आवास विकास परिषद से बुधवार (3 सितंबर) तक कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि 12 अगस्त को दिए आदेश के बाद अब तक क्या कदम उठाए गए।
न्यायमित्र ने बताया कि सेना के बार-बार अनुरोध के बावजूद राज्य सरकार और एलडीए ने आंख मूंदे रखीं, जिससे कब्जे बढ़ते गए। नतीजा यह कि सेना अब यहां केवल शॉर्ट रेंज फायरिंग कर पा रही है, लॉन्ग रेंज अभ्यास संभव नहीं है।
ब्रिगेडियर त्रिबेणी प्रसाद की 2011 की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण हटाना जरूरी है। केंद्र ने हलफनामे में बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बड़े हथियारों की ट्रेनिंग की जरूरत पड़ी, लेकिन रेंज सीमित होने से अभ्यास संभव नहीं हुआ।
राज्य सरकार ने बताया कि सर्वे टीम बना दी गई है और 11 दिसंबर 2020 की अधिसूचना बढ़ाने पर 30 सितंबर तक फैसला ले लिया जाएगा। यह अधिसूचना पहली बार 1977 में जारी हुई थी और अब सितंबर 2025 में खत्म हो रही है। केंद्र ने इसे बढ़ाने का अनुरोध राज्य सरकार को भेजा है।