लखनऊ। गोमतीनगर स्थित भरवारा रेलवे क्रासिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज के निर्माण में हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी (भू अर्जन) को 26 फरवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह निर्देश वैज्ञानिक स्वामी सत्यप्रकाश वेद विज्ञान सेवा समिति की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिया। याचिका में दलील दी गई है कि ओवरब्रिज का निर्माण लाखों लोगों के आवागमन और व्यापक जनहित के लिए अत्यंत आवश्यक है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण प्रोजेक्ट वर्षों से लटका हुआ है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से विशेष रूप से यह जानकारी मांगी है कि क्या जमीन अधिग्रहण के कारण विस्थापित होने वाले परिवारों को 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत लाभ दिया जाएगा। विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और क्षतिपूर्ति के लिए सरकार की स्पष्ट नीति क्या है।
इससे पूर्व, सेतु निगम के अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया था कि मुआवजा वितरण के लिए निगम ने पहले ही 27 करोड़ रुपये सरकारी कोष में जमा कर दिए हैं। वहीं, सरकारी वकील ने आश्वासन दिया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होते ही प्रभावितों को मुआवजा दे दिया जाएगा, जिससे निर्माण की अंतिम बाधा दूर हो जाएगी।
दो साल से लटका है प्रोजेक्ट
हाईकोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि सितंबर 2024 में दिए गए आदेशों के बावजूद अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दो साल से प्रोजेक्ट का लंबित रहना सुखद स्थिति नहीं है और अब इसकी नियमित निगरानी की जाएगी।