शहर की साफ-सफाई और छुट्टा जानवरों को हटाने को लेकर हाईकोर्ट का सख्त रुख बरकरार है। कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान नगर निगम को नौ दिन के भीतर शहर से छुट्टा जानवरों, खासकर सांड़ों को हटाकर उनका समुचित स्थान पर इंतजाम करने का निर्देश दिया है।
साथ ही प्रतिबंधित पॉलिथीन के उत्पादन व इनका इस्तेमाल अभियान चलाकर रोकने को कहा है। अदालत ने बरसात से पहले शहर के ड्रेनेज तथा छोटे-बड़े नाले-नालियों की पूरी सफाई कराने और नालों को ढकने को भी कहा है।
न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी व न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने निराश्रित जानवरों को हटाने का निर्देश देने के साथ यह भी कहा कि सफाई के मुद्दों पर कोर्ट के आदेशों पर गंभीरता से अमल करें।
शेष हलफनामा एक हफ्ते में दाखिल न हुआ तो रुकेगा वेतन
कोर्ट में बुधवार को पूर्व आदेश के तहत संबधित लोगों के हलफनामे दाखिल किए। हालांकि, इसके बाद भी कुछ लोगों (ठेकेदार व सुपरवाइजर) के हलफनामे दाखिल नहीं हो सके हैं। इस पर कोर्ट ने एक सप्ताह का और समय देते हुए कहा कि अब भी शेष हलफनामे दाखिल नहीं हों तो संबंधित के वेतन व भुगतान रोक दिए जाएं।
घरों से नियमित उठे कूड़ा, वरना वसूला जा सकता है जुर्माना
कोर्ट ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमित रूप से घरों से कूड़ा उठे, इसका ध्यान रखें. यदि ऐसा नहीं होता तो जुर्माना वसूला जा सकता है। कोर्ट ने नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद के साथ डीएम व एसएसपी को निर्देश दिया कि शहर की सफाई में एक-दूसरे का पूरा सहयोग करें।
नगर निगम की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य सरकार खुद कूड़ा उठवाने के साथ शहर की सफाई से जुड़े मुद्दों की कार्ययोजना बना रही है। महाधिवक्ता ने इसके लिए 15 जुलाई तक का समय मांगा। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की है।
सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी अधिवक्ता कुलदीप पति त्रिपाठी के साथ पेश हुए। नगर आयुक्त ने सफाई के मुद्दे पर अब तक की कार्रवाई की जानकारी दी। मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्र और अवध बार के अन्य वकीलों ने भी सफाई व्यवस्था को लेकर सुझाव दिए।
गौरतलब है कि सोमवार को भी अफसरों ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अमल में कुछ हलफनामे दाखिल किए थे। बाकी दाखिल करने को बुधवार तक का समय मांगा था, पर अफसर सभी हलफनामे दाखिल नहीं कर सके।