फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नवरात्र मनाएं, पर न होने पाए उपद्रव : हाईकोर्ट

Wed, 14 Oct 2015 11:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्र के आयोजनों पर फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान ऐसे उत्सवों की मनाही नहीं करता लेकिन इनमें किसी उपद्रव या किसी के निजी अधिकारों के उल्लंघन की इजाजत भी नहीं देता।
विज्ञापन


कोर्ट के मुताबिक आम जनजीवन की हिफाजत करना भी प्रशासन की ड्यूटी है। धार्मिक आस्थाएं संविधान के तहत संरक्षित व सुरक्षित हैं, इन्हें जारी रखा जाना है।

ऐसे में प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से किनारा नहीं कर सकता लेकिन साथ ही याचियों और आयोजनों से जुड़े अन्य लोगों को भी अपने मूल कर्तव्यों का पालन करते रहना होगा।

न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति अताउर्रहमान मसूदी की खंडपीठ ने सोमवार को यह अहम फैसला सूबे के विभिन्न जिलों की दुर्गा पूजा समितियों की ओर से दायर 11 याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए सुनाया। ये सभी मामले नवरात्र में दुर्गापूजा आयोजनों आदि से संबंधित थे।
विज्ञापन

Trending Videos
विज्ञापन

इस बात पर दिया खासा जोर

अदालत ने फैसले में इस बात पर खास जोर दिया कि प्रशासन न सिर्फ दुर्गापूजा संबंधी शोभायात्राओं (जुलूसों) और मूर्तियां खास जगहों पर स्थापित करने में सावधानी बरते बल्कि आम जनता की भलाई भी दिमाग में रखे।

किसी भी रिहायशी इलाकेमें शांति और लोक व्यवस्था पर भी गौर करना होगा ताकि ऐसे आयोजनों और कार्यक्रमों से लोगों के निजी अधिकारों में खलल न पड़े। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सब शांतिपूर्ण कार्यक्रम व आयोजन संपन्न होने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि नागरिकों के मूल अधिकार भी सुरक्षित रहने चाहिए।

इन आयोजनों के दौरान सार्वजनिक जगहों पर अतिक्रमण और पंडाल लगाने, सड़कें बाधित करने, प्रदूषण व सामान्य जीवन प्रभावित करने संबंधी मुद्दों की भी प्रशासन द्वारा उपेक्षा न करने की बात कोर्ट ने कही है।

अदालत ने कहा कि कोई भी धार्मिक क्रिया-कलाप बड़े पैमाने पर समाज के खिलाफ बंदिश के रूप में नहीं माना जा सकता। अदालत ने इन अहम टिप्पणियों और विधि व्यवस्था केसाथ हाल ही में दो न्यायाधीशों की एक अन्य खंडपीठ के फैसले के प्रकाश में इन याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें