हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्र के आयोजनों पर फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान ऐसे उत्सवों की मनाही नहीं करता लेकिन इनमें किसी उपद्रव या किसी के निजी अधिकारों के उल्लंघन की इजाजत भी नहीं देता।
कोर्ट के मुताबिक आम जनजीवन की हिफाजत करना भी प्रशासन की ड्यूटी है। धार्मिक आस्थाएं संविधान के तहत संरक्षित व सुरक्षित हैं, इन्हें जारी रखा जाना है।
ऐसे में प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से किनारा नहीं कर सकता लेकिन साथ ही याचियों और आयोजनों से जुड़े अन्य लोगों को भी अपने मूल कर्तव्यों का पालन करते रहना होगा।
न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति अताउर्रहमान मसूदी की खंडपीठ ने सोमवार को यह अहम फैसला सूबे के विभिन्न जिलों की दुर्गा पूजा समितियों की ओर से दायर 11 याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए सुनाया। ये सभी मामले नवरात्र में दुर्गापूजा आयोजनों आदि से संबंधित थे।