प्रदेश सरकार ने एकल जज के निर्णय के खिलाफ दायर विशेष अपील में कहा था कि सीबीआई जांच के लिए आदेश नहीं दिए जा सकते थे क्योंकि मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की वजहें मौजूद नहीं थीं। अगर ऐसा होता तो क्षेत्रीय जांच एजेंसी इसके लिए कदम उठाती।
केवल विभाग में तैनाती से जांच पर संदेह नहीं
अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच के लिए बनी कमेटी में बेसिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को शामिल किया गया, केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वे निष्पक्ष जांच नहीं करेंगे। ये अधिकारी आईएएस स्तर के हैं, उनकी समिति केवल मामले में लगे आरोपों और त्रुटियों की जांच के लिए बनी है। उनके निष्कर्ष के आधार पर कोर्ट या राज्य सरकार उचित निर्देश दे सकते थे। उनकी सदाशय पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए था।
अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने कहा कि देश के संघीय ढांचे के अनुरूप केंद्र और राज्य सरकारों की अपनी अपनी जांच एजेंसियां होती हैं। सीबीआई एक स्वतंत्र जांच एजेंसी है, इसे केंद्र नियंत्रित नहीं कहा जा सकता। सामान्य मामलों में राज्य के मामलों की जांच राज्य की एजेंसियां करती हैं। अगर राज्य की एजेंसी से जांच ले ली जाएगी तो यह लोगों का इन एजेंसियों में विश्वास कम करेगा। विशेष जांच की जरूरत केवल विशेष मामलों में हो सकती है।
इन पांच हालात में ही सीबीआई जांच
सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए वे पांच स्थितियां बताई जहां सीबीआई जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। ये इस प्रकार थीं -
- जिन मामलों में राज्य सरकार के उच्च अधिकारी संलिप्त हों
- जिन मामलों में जांच एजेंसियों के टॉप के अधिकारियों पर ही आरोप हों और वे जांच प्रभावित कर सकते हों
- ऐसा करना न्याय और लोगों के जांच में विश्वास की बहाली के लिए जरूरी हो, या जहां जांच एजेंसियां प्रथम दृष्ट्या दागी व पक्षपाती मिलें।
- जहां राज्य पुलिस व पुलिस के उच्च अधिकारी जांच को गलत ढंग से करें
- विशेष परिस्थितियां जहां जांच में तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत हो या उच्च स्तर के आर्थिक अपराध हों।
इस परीक्षा में शामिल सोनिका देवी ने याचिका दायर कर परीक्षा प्रक्रिया पर आपत्तियां जताई गईं। सुनवाई के दौरान परीक्षा नियामक प्राधिकरण इलाहाबाद से मंगवाए गए दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें सामने आया कि अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को बदला गया है। सरकार ने जांच के लिए समिति बनाई, जिसमें प्रमुख सचिव चीनी उद्योग संजय आर भूसरेड्डी को अध्यक्ष और सर्व शिक्षा अभियान निदेशक वेदपति मिश्रा व बेसिक शिक्षा के डायरेक्टर सर्वेंद्र विक्रम सिंह को सदस्य बनाया गया। प्राधिकरण सचिव सुतता सिंह को निलंबित किया गया। समिति ने बताया कि 12 अभ्यर्थियों की कॉपियां में गड़बड़ियां सामने आई। 23 अभ्यर्थियों को परीक्षा परिणाम की दूसरी लिस्ट में योग्य घोषित किया गया, वे पहली लिस्ट में फेल थे। वहीं 24 अभ्यर्थियों को योग्य होते हुए भी आयोग्य घोषित किया गया। इस याचिका पर एक नवंबर को दिए निर्णय में हाईकोर्ट ने पूरे मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।