इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या को समाज के खिलाफ अपराध करार दिया। वहीं आरोपी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत निरुद्ध किए जाने को भी सही ठहराया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश पर मुहर लगाते हुए रासुका की कार्यवाही के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने नजीर वाला यह फैसला सीतापुर के आरोपी रामसेवक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया।
याची पर 10 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने का आरोप है। इस मामले में सीतापुर के जिलाधिकारी ने एक अक्तूबर 2021 को याची के खिलाफ रासुका के तहत निरुद्धि की कार्यवाही की थी। याची ने इसी आदेश को चुनौती दी थी।
कोर्ट ने फैसले में कहा कि नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म व उसकी हत्या की घटना से लोगों में भय व दहशत की भावना पैदा होती है। इस तरह के अपराध को मृतक के खिलाफ व्यक्तिगत अपराध नहीं कहा जा सकता है, यह समाज के खिलाफ भी अपराध होता है। इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याची को रासुका की कार्यवाही से राहत देने से इन्कार कर याचिका खारिज कर दी।