इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के बालगृहों की बेहतरी और वहां रहने वाले बच्चों के हितों से जुड़े मामले की जनहित याचिका पर सुनवाई 29 सितंबर को नियत की है। कोर्ट ने उस रोज मामले के सभी संबंधित पक्षकारों को गत 26 मई के आदेश के तहत मांगे गए जवाबी हलफनामे पेश करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश अनूप गुप्ता की जनहित याचिका पर दिया। पहले कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि ये बाल गृह सरकार और समाज का भार साझा कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा था कि बिजली बिल के बकाए के संबंध में इन्हें यथोचित राहत देने पर विचार किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने राज्य सरकार के उस जवाब को पूरी तरह खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि बालगृहों को बिजली बिल टैरिफ में पहले से राहत देते हुए घरेलू दर लागू किया जाता है। कोर्ट ने कहा था कि बालगृहों पर भी शुरुआत में व्यवसायिक दर पर ही बिल लिया जा रहा था लेकिन उसके आदेश के बाद घरेलू दर लागू की गई। अदालत ने कहा था कि जैसे हम अपने घरों में रहते हैं वैसे ही किशोरों के लिए ये बाल गृह उनके घर हैं। इस आधार पर यही तर्कसंगत है कि उन पर भी घरेलू दर ही लागू किया जाए। कोर्ट ने कहा कि हालांकि घरेलू दर लागू करने के बावजूद बालगृहों को भारी-भरकम बिल भेजा जा रहा है।
कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता एमएम पांडेय को आदेश दिया था कि संवेदनशीलता देखते हुए इसे सरकार में उच्च स्तर पर रखा जाए। कोर्ट ने उम्मीद भी जताई थी कि बालगृहों को बिजली बकाये के संबंध में यथोचित राहत दी जाएगी। इसके बाद गत 26 मई को बाल गृहों की बेहतरी संबंधी कई मुद्दों पर निर्देश देकर संबंधित लोगों को हलफनामे पेश करने का आदेश दिया था।