उधर, राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कहा कि याची ने महज एक खबर के आधार पर याचिका दाखिल की है और डीजीपी के चयन के लिए भेजे गए नामों की जानकारी को संबंधित अफसरों को पहले देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
ऐसे में याची को यह याचिका दायर करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि संबंधित नियम-कानून के मुताबिक याची का भी नाम आयोग को भेजा गया है, लिहाजा याचिका खारिज किए जाने लायक है। इसके जवाब में याची की अधिवक्ता नूतन ठाकुर का कहना था कि याची का नाम याचिका दायर होने के बाद भेजा गया।
अदालत ने कहा कि महानिदेशक स्तर के अधिकारी को खबरों के आधार पर याचिका नहीं दाखिल करनी चाहिए थी, वह भी जब ऐसा कोई कानूनी प्रावधान न हो कि पैनल में शामिल होने वाले नाम संबंधित को बताए जाएं। चूंकि याची का नाम प्रकाश सिंह केस के दिशा-निर्देशों और संबंधित नियमों के तहत आयोग को भेजा गया है, ऐसे में याचिका सारहीन होने की वजह से खारिज की जाती है।