इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करने का विरोध करने वाले राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने के आग्रह वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति मुनीश्वरनाथ भंडारी और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने यह फैसला स्थानीय अधिवक्ता अशोक पांडेय की याचिका पर सुनाया।
याचिका में सिर्फ केंद्र सरकार को ही पक्षकार बनाया गया था। अदालत ने कहा कि याचिका में अन्य जरूरी पक्षकार नहीं बनाए गए हैं। ऐसे में इस पर सुनवाई नहीं की जा सकती है। याची का कहना था कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्री खुलेआम सीएए का विरोध कर रहे हैं और राज्यों में इसे न लागू करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि इन राज्यों में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की कार्रवाई करे।
याची का तर्क था कि संसद से पारित कानून को लागू करने के लिए हर राज्य बाध्य है। वे इसे लागू करने से इनकार नहीं कर सकते। याची का कहना था कि चूंकि केंद्र सरकार इसके बावजूद ऐसे राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने की कार्रवाई नहीं कर रही है। लिहाजा केंद्र सरकार को इसके निर्देश दिए जाएं। उधर केंद्र सरकार की तरफ से सहायक सॉलिसिटर जनरल एसबी पांडेय पेश हुए।