हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डीजीपी के चयन की प्रक्रिया रोकने की प्रार्थना नामंजूर कर दी है। अदालत वरिष्ठ आईपीएस अफसर तथा डीजी नागरिक सुरक्षा जेएल त्रिपाठी की याचिका पर अब 27 जनवरी को सुनवाई करेगी। याचिका में राज्य सरकार की तरफ से प्रदेश में नए डीजीपी के चयन को लेकर संघ लोक सेवा आयोग को भेजे गए नामों पर सवाल उठाया गया है।
जस्टिस राजेश सिंह चौहान की बेंच के सामने शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई हुई। याची की ओर से कहा गया कि प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक राज्य को संघ लोक सेवा आयोग को वरिष्ठतम आईपीएस अफसरों की सूची भेजने के निर्देश दे रखे हैं।
वहीं, आयोग की ओर से इनमें राज्य सरकार को तीन नाम चयनित कर भेजने का आदेश है। लेकिन राज्य सरकार ने प्रदेश में कार्यरत वरिष्ठतम आईपीएस अफसरों में तीसरे स्थान पर होने के बाद भी त्रिपाठी का नाम नहीं भेजा। उनसे जूनियर अफसरों के नाम भेजे, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले में महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह बहस करेंगे। कोर्ट ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर अगली सुनवाई 27 जनवरी को नियत की है। याची की वकील नूतन ठाकुर ने तब तक के लिए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया रोकने की प्रार्थना की जिसे कोर्ट ने नामंजूर कर दिया।