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200 से ज्यादा एमबीबीएस स्टूडेंट्स को हाईकोर्ट ने दी खुशखबरी

Fri, 16 Jun 2017 09:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : demo pic
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश के तीन प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों द्वारा नीट 2016 में शामिल हुए 208 एमबीबीएस विद्यार्थियों के एडमिशन को रद्द करने के मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्णय को खारिज कर दिया है। 
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इन विद्यार्थियों के एडमिशन कॉलेजों ने अपने स्तर पर काउंसलिंग के जरिए दिए थे, जबकि केंद्रीयकृत काउंसलिंग एसजीपीजीआई लखनऊ में आयोजित की गई थी। 

ऐसे में डायरेक्टर जनरल ऑफ मेडिकल एजूकेशन ने इन विद्यार्थियों के नाम एडमिशन पाए विद्यार्थियों की सूची में शामिल नहीं किया था। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा, एडमिशन के दौरान एमसीआई द्वारा निर्धारित मानकों का पालन हुआ है, सुप्रीम कोर्ट अपने निर्णयों में मेरिट के सामने प्रशासकीय त्रुटि को बाधा मानने से इन्कार कर चुकी है।

इस मामले में तीनों प्राइवेट कॉलेजों ने तीन याचिकाएं दायर की थी। इनमें सरस्वती मेडिकल कॉलेज ने 38, वेंकटेश्वरा इंस्टीट्यूट ने 104 और कृष्णमोहन मेडिकल कॉलेज ने 66 विद्यार्थियों को अपने एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन दिया था। 
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जानें, कोर्ट ने क्या कहा

court demo pic
विद्यार्थी केंद्रीयकृत काउंसलिंग बोर्ड के समक्ष उपस्थित नहीं हुए थे, इन्हें संबंधित कॉलेजों ने अपने यहां काउंसलिंग करवा कर एडमिशन दिए थे। यह प्रक्रिया काउंसलिंग के लिए एमसीआई द्वारा निर्धारित तारीख को ही पूरी की गई और उसी दिन इन एडमिशन की सूची डीजीएमई को भेज दी गई थी। 

ये सभी विद्यार्थी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट 2016 में शामिल हुए थे और एडमिशन के लिए निर्धारित मेरिट में शामिल थे। लेकिन इनके एडमिशन को डीजीएमई ने अपनी सूची में शामिल नहीं दर्शाया। 

वहीं एमसीआई द्वारा 21 जनवरी 2017 और उसकी मॉनिटरिंग सब कमेटी द्वारा 9 व 20 जनवरी 2017 को दिए गए निर्णय में इन दाखिलों को नहीं माना गया। जिसके आधार पर 27 जनवरी को संयुक्त सचिव एमसीआई ने इन दाखिलों को रद्द करार दिया। 

वहीं याची के अनुसार वे 150 विद्यार्थियों को एडमिशन देने की क्षमता रखते हैं और ये एडमिशन इसी सीमा में किए गए हैं। अन्य नियमों को भी वे पूरा करते हैं। ऐसे में इन विद्यार्थियों के नाम भी एडमिशन सूची में शामिल होने चाहिए। 

जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला और जस्टिस शिव कुमार सिंह - प्रथम ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा मामले में विद्यार्थियों का कॅरिअर पर प्रभाव पड़ रहा है। 

प्रशासकीय गलतियों को मेधावी विद्यार्थियों के मार्ग में बाधा नहीं बनाया जा सकता। संस्थानों या किसी व्यक्ति की गलती की वजह से उनके एडमिशन पर असर नहीं होना चाहिए। उनके एडमिशन एमसीआई द्वारा निर्धारित नियमों के तहत किए गए हैं। 

वे नीट 2016 में क्वालिफाइंग मार्क्स हासिल कर चुके हैं, कॉलेजों ने जो दाखिले वे भी विद्यार्थी क्षमता के अंदर ही हैं। ऐसे में एमसीआई द्वारा 21 जनवरी 2017 और उसकी मॉनिटरिंग सब कमेटी द्वारा 9 व 20 जनवरी 2017 को दिए गए निर्णय खारिज किए जाते हैं। वहीं एमसीआई संयुक्त सचिव के 27 जनवरी के आदेश भी खारिज किए जाते हैं। 
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