बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती में कटऑफ कम करने संबंधी हाईकोर्ट के फैसले पर शासन के निर्णय नहीं लिए जाने से 4 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। जबकि हाईकोर्ट के आदेश पर अपील की मियाद भी निकल चुकी है, लेकिन विभाग यह फैसला नहीं कर पाया कि वह एकल पीठ का निर्णय लागू करे या इसके खिलाफ अपील की जाए।
बता दें, विभाग ने 6 जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा होने के बाद सहायक अध्यापक भर्ती के लिए कटऑफ निर्धारित किया था। इसमें सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए कटऑफ अंक 65 फीसदी और एससी, एसटी व ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए 60 फीसदी तय किया गया था। इसके बाद शिक्षामित्रों समेत अन्य अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा के बाद कटऑफ और अधिक कटऑफ निर्धारित करने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की एकल पीठ ने करीब दो महीने की सुनवाई के बाद 29 मार्च को सामान्य वर्ग के लिए 45 फीसदी और एससी, एसटी व ओबीसी के लिए 40 फीसदी कटऑफ निर्धारित करने का आदेश दिया। साथ ही इसमें अपील के लिए एक माह का वक्त भी दिया।
तत्कालीन विभागीय अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रस्ताव रखा। पर, वह एक माह में यह निर्णय नहीं करा सके कि अपील की जाए या नहीं। इधर, 30 अप्रैल को कुमार सेवानिवृत्त हो गए और रेणुका कुमार को विभागीय अपर मुख्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई। अब तक एकलपीठ के निर्णय के 40 दिन हो चुके हैं, लेकिन विभाग ने न तो उसका फैसला ही माना और न ही अपील करने पर निर्णय ले पाया है।
जबकि योगी सरकार ने मार्च से पहले शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति आदेश जारी करने की योजना बनाई थी। जिससे इसका लाभ सत्तारुढ़ दल को लोकसभा चुनाव में मिल सके। मगर, प्रदेश में पांच चरणों का मतदान पूरा हो चुका है, पर लिखित परीक्षा का परिणाम तक जारी नहीं हो पाया है।
मुझे कामकाज संभाले अभी 4-5 दिन ही हुए हैं। सहायक अध्यापकों की भर्ती मामले में अपील करने का प्रस्ताव दिया गया है। अधिकारियों से बात कर जल्द ही निर्णय करूंगी। -रेणुका कुमार, अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा