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वाजिब वजह के बगैर नहीं बदल सकते प्लॉट व फ्लैट

Thu, 05 Dec 2013 02:17 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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तर्कसंगत और कानूनी कारणों के बगैर विकास प्राधिकरण व कॉलोनाइजर्स किसी को आवंटित प्लॉट या फ्लैट का स्थान महज ब्याज के भुगतान पर नहीं बदल सकते।
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इन वजहों से बदलने की दशा में आवंटियों को समान प्रकृति व श्रेणी के भूखंड व फ्लैट दिए जाने चाहिए।

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने यह अहम विधि व्यवस्था राशिद उमर की रिट मंजूर करते हुए अपने फैसले में दी है।

कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी वैध वजह से कब्जा न दिया गया हो और आवंटन पूरा न हो सके तो ऐसे में विकास प्राधिकरणों व कॉलोनाइजर्स का यह दायित्व है कि आवंटी द्वारा जमा की गई कीमत पर ही उसे अन्य प्लॉट या भूखंड दिया जाए।
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कोर्ट ने इसकी वजह यह बताई कि लोग अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर पसंद की लोकेशन पर प्लॉट या फ्लैट बुक कराते हैं।

ऐसे में काफी समय बाद यह जरूरी नहीं है कि लोग पुनरीक्षित कीमत पर प्लॉट या फ्लैट ले पाएंगे। कोर्ट ने कहा, इन हालात में विकास प्राधिकरणों या कॉलोनाइजर्स की तरफ से किए गए किसी ‘कार्य’ से आवंटियों को दंडित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि राशिद उमर के इस मामले में यह नहीं प्रतीत होता है कि उसे पार्क के लिए चिन्हित जमीन पर प्लॉट दिया गया था।
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