इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बिकरू कांड पर तैयार की गई एसआईटी की रिपोर्ट समेत जय वाजपेयी मामले में विधि सम्मत कार्रवाई के आग्रह वाली जनहित याचिका को सोमवार को शुरुआती सुनवाई के बाद खारिज कर दिया।
कोर्ट ने याचिका को जनहित याचिका मानने से इन्कार करते हुए कहा कि यह निज हित में दायर की गई है। इसके लिए याची पर 25 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया जाता है।
मुख्य न्यायमूर्ति संजय यादव और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने यह आदेश कानपुर के वकील सौरभ भदौरिया की याचिका पर दिया।
याची का कहना था कि जय वाजपेयी चर्चित बिकरु कांड में अभियुक्त है। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सचिवालय में फर्जी एंट्री पास बनवाए जाने, फर्जी पासपोर्ट बनवाए जाने तथा फर्जी आर्म्स लाइसेंस बनाए जाने संबंधित मुकदमे भी दर्ज हैं। साथ ही उसके खिलाफ पहले से ही विभिन्न धाराओं में कई थानों में मुकदमे दर्ज थे। पूर्व में भी उसकी सहायता करने वाले तमाम पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कई जांच रिपोर्ट में कई संस्तुति की गईं थीं लेकिन इन पर आज तक सही कार्रवाई नहीं हुई है।
याचिका में पहले की इन रिपोर्टों पर कार्रवाई करने की गुजारिश की गयी थी साथ ही बिकरू कांड की एसआईटी रिपोर्ट को मंगवाते हुए उसकी संस्तुतियों पर कार्रवाई करने का भी आग्रह किया गया था।
उधर, राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील क्यू एच रिजवी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका, जनहित याचिका के रूप में सुनवाई लायक नहीं है और खारिज किए जाने योग्य है। कोर्ट ने याचिका को पीआईएल मानने से इन्कार कर निज हित वाली करार देकर 25 हजार हर्जाने का आदेश दिया है।