सूबे के अल्पसंख्यक आयोग में जैन, पारसी और बौद्ध समुदाय का कोई प्रतिनिधित्व न होने के आरोप वाली एक पीआईएल पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
राज्य सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता की गुजारिश पर अदालत ने मामले में निर्देश प्राप्त करने को दो हफ्ते का वक्त देकर अगली सुनवाई 29 अक्तूबर नियत की है।
जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश अखिल भारतीय जैन महासभा की तरफ से दायर की गई जनहित याचिका पर दिया।
याचिका में आरोप है कि 9 अप्रैल 2014 की अधिसूचना के तहत बने अल्पसंख्यक आयोग में अन्य अल्पसंख्यक समुदायों समेत महिला कोटे के सदस्यों तक को नामित किया गया है। लेकिन इसमें जैन, पारसी व बौद्ध समुदाय का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जो कानून की मंशा के खिलाफ है।