हाईकोर्ट ने एलडीए वीसी को किया तलब, कहा, अवमानना के आरोप तय किए जाने के लिए रहें मौजूद
सेवा संबंधी एक मामले में स्पष्ट आदेश के बाद भी उसका पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी प्रभु नारायण सिंह को तलब किया है।
उन्हें कोर्ट में मौजूद रहना होगा ताकि उन पर जानबूझ कर अदालती आदेशों की अवमानना के मामले में आरोप तय किए जा सकें।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने यह आदेश सुरैया बेगम की याचिका पर दिया। याचिका में कहा गया कि सुपरवाइजर के पद से सेवानिवृत्त हुए याची के पति की पेंशन प्राधिकरण मंजूर नहीं कर रहा है।
याची की दलील थी कि उनके पति शुरू में वर्क चार्ज कर्मचारी थे और वह 31 दिसंबर 2010 में स्थायी किए गए व 30 जून 2013 को रिटायर हुए।
पर, प्राधिकरण याची के पति की शुरुआती वर्षों में की गई सेवा को जोड़ नही रहा है और यह कह कर कि याची के पति की प्राधिकरण में 20 वर्ष की स्थायी सेवा नहीं है, लिहाजा उन्हें पेंशन स्वीकृत नही की जा सकती।
इसे लेकर पूर्व में भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिस पर अदालत ने 29 अगस्त 2018 को सर्वोच्च अदालत के एक आदेश की नजीर का हवाला देते हुए आदेश दिए थे कि पेंशन स्वीकृति के लिए अस्थायी रहने के दौरान याची की सेवा को जोड़ा न जाना कानून की मंशा के खिलाफ है।
कोर्ट ने तब प्राधिकरण के वीसी को याची के मसले पर गौर कर जरूरी कदम उठाने को कहा था। प्राधिकरण की तरफ से पेश वकील की दलील थी कि चूंकि अदालत ने प्राधिकरण को मुद्दे पर विचार कर निर्णय लेने को कहा था उसके अनुपालन में याची का प्रत्यावेदन स्वीकार करने योग्य नहीं पाया गया।
इसे लेकर प्राधिकरण की तरफ से हलफनामा भी लगाया गया। इस पर अदालत ने कहा कि कोर्ट के आदेश की जानबूझ कर अनदेखी की गई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त नियत करते हुए एलडीए के वीसी को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।