हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सूबे में अवैध खनन को लेकर अखिलेश यादव की यूपी सरकार को आड़े होथों लिया है। बेंच ने चार हफ्ते में एक सख्त कानून बनाने का हुक्म दिया है।
बेंच ने अवैध खनन पर रोक लगाए जाने के आग्रह वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ऐसा कहा।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह व न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने शुक्रवार सुबह बीती तीन अगस्त को टली सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए यूपी सरकार की तरफ से पेश किए गए अवैध खनन पर कार्रवाई के आंकड़े देखे।
अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोबियाल ने हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा राज्य सरकार से मांगा गया ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बेंच को यह भी बताया कि सरकार इस मसले को लेकर संजीदगी से विचार कर रही है। खनन को लेकर नियम भी बनाए जा रहे हैं।
इस पर बेंच ने कहा कि जो भी कानून बनाया जा रहा है, उसमें इस बात का ध्यान रखा जाए कि खनन के लिए पट्टा देने से पहले सरकार केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से इंन्वायर्नमेंटल क्लीयरेंस लें और उसके बाद ही नियमानुसार पट्टा दिया जाए। कुल मिलाकर कानून इतना सख्त हो कि प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग न हो सके।
गौरतलब है कि तीन अगस्त को हुई सुनवाई में बेंच ने ने राज्य और केंद्र की सरकार को आड़े हाथों लिया था और केंद्र व यूपी सरकार से नागपाल के निलंबन से पहले और बाद में अवैध खनन पर की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी मांगी थी।
हालांकि, दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को नियोक्ता और कर्मचारी के बीच का मसला बताते हुए कोर्ट ने कहा था कि इसका फैसला राज्य सरकार ही कर सकती है।