इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को सात दिन में जवाब देने को कहा है। यह याचिका सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी एवं अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने दायर की है।
पांडेय ने हाईकोर्ट से निवेदन किया था कि इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के बारे में जारी प्रदेश सरकार की अधिसूचना खारिज की जाए। इसकी वजह बताई थी कि उप्र रेवेन्यू कोड 2006 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन सरकार ने नहीं किया।
जनहित को ध्यान में नहीं रखा गया, केवल राजनीतिक लाभ पाने के लिए नाम बदला गया है। इसकी वजह से केंद्र व प्रदेश सरकार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। इन हालात में 18 अक्तूबर तक उपयोग हो रहा इलाहाबाद नाम वापस रखा जाना चाहिए। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने याचिका का विरोध किया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने प्रदेश व केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। साथ ही अन्य पक्षों को भी अपना जवाब देना होगा, इनमें राजस्व बोर्ड अध्यक्ष व प्रमुख सचिव गवर्नर भी शामिल हैं। अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी। यानी जवाब दाखिल करने के लिए सभी पक्षों को सात दिन का समय मिला है।