लखनऊ। इमरजेंसी में हीमोडायनेमिक मॉनिटरिंग विधि से डॉक्टर गंभीर मरीजों के दिल की खून पंप करने की क्षमता और महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन आपूर्ति का आकलन कर सकते हैं। इससे मरीज के इलाज में समय रहते आवश्यक बदलाव करना आसान होता है।
पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन के मार्गदर्शन में ईएमपीएआरवी इंटरनेशनल- 2026 के तहत शुक्रवार को हीमोडायनेमिक असेसमेंट कार्यशाला हुई। एईएमई और संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग ने यह कार्यशाला आयोजित की। विशेषज्ञों ने गंभीर मरीजों की आधुनिक निगरानी के तरीके बताए। डॉ. आरके धीमन ने कहा कि क्रिटिकल मरीजों की स्थिति तेजी से बदल सकती है। यह तकनीक फ्लूड की आवश्यकता और रक्तचाप बढ़ाने वाली दवाओं की प्रभावशीलता तय करने में मदद करती है। शॉक और सेप्सिस में यह विशेष रूप से उपयोगी है।