लखनऊ। साइबर क्राइम पुलिस ने बुधवार को जालसाजों की मदद करने के आरोपी निजी बैंक के डिप्टी ब्रांच मैनेजर को उसके घर गुडंबा स्थित किरन एन्क्लेव से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, ठगी की रकम खातों में लेने वाले आरोपी के दो साथियों बस्ती के बभनान निवासी उमाकांत और वहीं का खम्हरिया निवासी राजीव विश्वास को भी महानगर गोल मार्केट से दबोच लिया गया।
डीसीपी अपराध कमलेश दीक्षित के मुताबिक उत्तम इंडसइंड बैंक की शाखा चिनहट में 15 वर्ष से तैनात है। वही गिरोह का मास्टर माइंड है। वह दोनों साथियों के बैंक खाते खोलने में मदद करता था। पूछताछ में उमाकांत ने बताया कि वह और राजीव फर्जी रियल एस्टेट की फर्म बनाकर बैंकों में खाते खुलवाते हैं। इन्हीं खातों में वे गेमिंग व लोगों से ऑनलाइन की ठगी से मिली करोड़ों की रकम खातों में लेते थे।
डिप्टी मैनेजर ने अपने बैंक में भी खुलवाया था खाता
उमाकांत ने बताया कि बुधवार को भी वह और राजीव आकाश रियल स्टेट एंड डेवलपर्स प्रा.लि. के नाम से खाता खुलवाने की योजना बना रहे थे। बैंक में खाता खुलवाने में इंडसइंड बैंक का डिप्टी ब्रांच मैनेजर भी उनका साथ देता है। आरोपी ने एक खाता अपनी बैंक में भी फर्जी फर्म सनराइज सॉल्यूशन प्रा.लि. के नाम से खाेला है। उनका दूसरा खाता कोटक बैंक में खुलवाने में उत्तम ने मदद की थी।
इंडसइंड बैंक के खाते में ले चुके हैं ठगी के 20 करोड़ रुपये
इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव ने बताया कि डिप्टी ब्रांच मैनेजर को खाता खुलवाने व सहयोग करने पर ठगी की रकम का 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था। अब तक उमाकांत व राजीव इंडसइंड बैंक खाते में 20 करोड़ रुपये ले चुके थे।
बैंक के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
आरोपी उत्तम अन्य लोगों को भी अपनी बैंक में खाता खुलवाने पर ऊंची रकम देने का लालच देता था। लालच में आने पर उत्तम लोगों की फोटो व अन्य दस्तावेज लेकर फर्जी फर्म से खाता खोल देता था। ठगी में उत्तम के साथ बैंक के उच्च अधिकारियों के भी मिलीभगत होने की आशंका है। इंस्पेक्टर ने बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
40 लाख का कर्ज चुकाने के लिए करने लगा जालसाजी
लखनऊ। ठगी की रकम के लिए खाता खुलवाने वाले इंडसइंड बैंक के ब्रांच मैनेजर उत्तम विश्वास पर 40 लाख रुपये का कर्ज था। वहीं, गलत आदतों के कारण उमाकांत भी 80 लाख रुपये गवां चुका था। पांच वर्ष पहले उत्तम की मुलाकात उमाकांत से हुई। दोनों ने जालसाजी का खेल शुरू कर दिया। डीसीपी अपराध कमलेश दीक्षित ने बताया कि उत्तम को पता था कि फर्म के नाम पर खोले गए खाते में ठगी की रकम लेने में समस्या नहीं होती। इसलिए उसने सिर्फ फर्म के नाम से खाते खोले। एटीएम के जरिये आरोपी खातों से रकम निकाल लेते थे। 20 करोड़ में से कमीशन के नौ लाख देने के बाद उमाकांत व राजीव ने रकम निकाल ली। इस रकम से उमाकांत ने 27 अक्तूबर को पत्नी के नाम पर जमीन और सोने के जेवर खरीदे थे।
साइबर पोर्टल पर दर्ज हैं 40 केस
डीसीपी ने बताया कि आरोपियों के पास से 30 हजार रुपये, पांच मोबाइल, छह डेबिट कार्ड, दो आधार कार्ड और एक पैन कार्ड, चेक बुक और पासबुक बरामद हुई है। साइबर पोर्टल देखने पर सामने आया कि आरोपियों के खिलाफ विशाखापत्तनम, पश्चिम बंगाल, गुरुग्राम व हैदराबाद में 40 केस दर्ज हैं। आरोपियों की गिरफ्तार की जानकारी विभिन्न राज्यों की पुलिस को भी दी गई है।
विदेश से भी भेजी गई रकम
डीसीपी ने बताया कि दो खातों की जांच में िवदेश से भी भेजी गई रकम मिली है। अब रकम भेजने वाले का पता लगाया जा रहा है। जांच में साइबर पुलिस के साथ ही टेक्निकल टीम भी लगी है।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।