केस-1 संडीला हरदोई निवासी राहमिन (35) का एक वॉल्व खराब है। केजीएमयू के सीवीटीएस विभाग की ओपीडी में दिखाया था जहां डॉक्टर ने वॉल्व बदलने के लिए करीब एक लाख का खर्च बताया। करीब दो साल पहले उन्होंने असाध्य कार्ड बनवाया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन में लगने वाली दवाएं व संसाधन के लिए मांगपत्र (इंडेंट) भेजा था मगर वहां से कुछ नहीं मिला। मरीज दोबारा भर्ती होने बृहस्पतिवार को आया तो उसे असाध्य कार्ड की वैधता समाप्त होने की बात कहकर नया कार्ड बनवाने पर ऑपरेशन की मुफ्त सुविधा देने की बात कहकर वापस कर दिया गया।
केस- 2 लखीमपुर खीरी निवासी शिवा (11) सीवीटीएस विभाग में 18 फरवरी से भर्ती हैं। बच्चे के दिल में छेद है। मरीज आयुष्मान का पात्र है। विभाग के डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए दवाएं व ऑपरेशन में लगने वाले उपकरण के लिए मांगपत्र भेजा था। बृहस्पतिवार को बच्चे के ऑपरेशन की डेट दी गई थी। इंडेंट न आने से बच्चे का ऑपरेशन टल गया। पिता का आरोप है कि पूरे दिन चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की दौड़ लगाते रहे मगर मांगपत्र की दवाएं न मिलने से मरीज का ऑपरेशन टाल दिया गया।
केस-3 श्रावस्ती के मल्लेहपुर का निवासी रामेन (15) सीवीटीएस विभाग में 12 फरवरी से भर्ती है। बच्चे के दिल में सुराख है। विभाग ने ऑपरेशन के लिए इंडेंट भेजा था। ऑपरेशन की डेट भी तय हो गई थी। तय समय पर इंडेंट न मिलने पर बच्चे का ऑपरेशन टल गया। तीमारदार इंडेंट के लिए चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में दौड़ लगा रहे हैं मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
यह मामले महज बानगी भर हैं। केजीएमयू में अब दिल के मरीजों की जान पर बन आई है। कॉर्डियो वैस्कुलर थोरैसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग में ऑपरेशन के इंतजार में मरीजों की सांसें उखड़ रही हैं। उन्हें मुकम्मल इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। इलाज के इंतजार में पहले दो मरीजों की जान चली गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें चार माह बाद ऑपरेशन की डेट दी थी। गरीब मरीज ऑपरेशन के इंतजार में पड़े हैं।
400 से अधिक मरीज ऑपरेशन के इंतजार में
डेमो
वहीं ऑपरेशन की डेट तय होने के बाद भी विभाग में दवाओं का मांगपत्र व संसाधन न आने से मरीजों के ऑपरेशन टल रहे हैं। तीमारदारों को इंडेंट के लिए चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय दौड़ाया जा रहा है। ऐसे मरीजों की फेहरिस्त लंबी है। विभागीय अफसरों की मानें तो मरीजों के ऑपरेशन के लिए इंडेंट भेजे गए हैं। जहां से सामान व दवाएं मिलते ही ऑपरेशन कर दिया जाएगा।
केजीएमयू के सीवीटीएस में मरीजों के ऑपरेशन की वेटिंग बढ़ती जा रही है। यहां पर करीब 400 मरीज ऑपरेशन के इंतजार में हैं। इसमें से कई ने निजी संस्थान जाकर सर्जरी करा ली। जबकि कई मरीजों की सर्जरी न होने से सांसे तक उखड़ गईं। गंभीर मरीजों को ऑपरेशन के लिए पांच से छह महीने का इंतजार करना पड़ रहा है।
ओपीडी के एक तिहाई मरीजों को सर्जरी की जरूरत
केजीएमयू के सीवीटीएस विभाग की ओपीडी में करीब 100-150 मरीज आते हैं। इसमें आधे मरीज पुराने होते हैं। ओपीडी में आने वाले एक तिहाई मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इसमें रोजाना 25-30 मरीजों को ऑपरेशन की डेट दी जा रही है।
मरीज के दस्तावेजों में रही होगी कमी
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बीपीएल, आयुष्मान व असाध्य मरीजों के लिए इंडेंट फौरन चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय भेज दिए जाते हैं। वहां से दवाएं व सामान मिलते ही मरीजों का ऑपरेशन कर दिया जाता है। दो साल में इंडेंट न आने के मामले की जानकारी नहीं है। मरीज के दस्तावेजों में कोई कमी होगी। उसी वजह से इंडेंट नहीं आया होगा। फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी।
- प्रो. एसके सिंह, विभागाध्यक्ष सीवीटीएस, केजीएमयू
किए जा रहे कारगर उपाय
विभागों से आने वाले इंडेंट को निजी फार्मा कंपनी के जरिए मंगवाया जाता है। इसमें करीब दो-तीन दिन का समय लगता है। सीवीटीएस विभाग में हार्ट के वॉल्व बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं, उन्हें कंपनी के जरिए क्रय कराया जाता है। ऐसे में थोड़ा समय लग जाता है। फिलहाल इस व्यवस्था से निपटने के लिए कारगर उपाय किए जा रहे हैं। इंडेंट आने पर मरीजों को फौरन वॉल्व समेत अन्य संसाधन उपलब्ध होंगे।
- प्रो. बीके ओझा, चिकित्सा अधीक्षक, केजीएमयू