सीपीआर देकर बचाई जा सकती है हृदयाघात पीड़ितों की जान
लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. आदित्य कपूर के मुताबिक, सीपीआर देकर हृदयाघात पीड़ितों की जान बचाई जा सकती है। इसके लिए हमें सीपीआर देने का सही तरीका सीखना चाहिए। प्रो. आदित्य कपूर बुधवार को विकास परिषद भवन में हुई कार्यशाला में बोल रहे थे।
कार्यशाला के बाद विकास परिषद भवन में स्वचालित बाह्य डिफाइब्रिलेटर स्थापित किया गया। यह एक शॉक मशीन है, जो सीपीआर सीखने के अलावा अचानक हृदयाघात के पीड़ितों को बचाने की तकनीक का हिस्सा है। प्रो. कपूर ने बताया कि हमारे देश में हर साल छह से सात लाख लोगों की घर या सार्वजनिक स्थानों पर अचानक हुए हृदयाघात से माैत हो जाती है। कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) के रूप में जीवनरक्षक उपाय शुरू करने में हर एक मिनट की देरी से बचने की संभावना 10 प्रतिशत कम हो जाती है। इस माैके पर उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के आवास आयुक्त डॉ. बलकार सिंह, उप आवास आयुक्त पल्लवी मिश्रा माैजूद रहे।