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Lucknow News: तेज बुखार और बदन दर्द ठीक होने के बाद बंद हो गया सुनाई देना

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स्क्रब टायफस प्रतीकात्मक तस्वीर।
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लखनऊ। परजीवी के काटने से होने वाली स्क्रब टायफस की बीमारी बहरेपन की वजह भी बन सकती है। केजीएमयू और संजय गांधी पीजीआई में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं। यहां तेज बुखार और बदन दर्द की समस्या के साथ भर्ती किए गए मरीजों की जांच में स्क्रब टायफस नाम की बीमारी का पता चला। इसका इलाज हुआ तो बीमारी तो ठीक हो गई, लेकिन उन्हें सुनाई देना बंद हो गया।
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स्क्रब टायफस के बाद बहरेपन की समस्या वाले ये मामले पीजीआई की डॉ. अंजू दिनकर और प्रो. रुंगमई मारक और केजीएमयू के डॉ. जितेंद्र कुमार ने पेश किए। डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि इस तरह के दो मामले केजीएमयू और एक पीजीआई में आया था। इनमें 21 से 35 वर्ष की उम्र के युवकों को तेज बुखार, बदन दर्द और असामान्य मानसिक अवस्था के साथ भर्ती किया गया। इलाज के बाद सभी ठीक हो गए, लेकिन इसके बाद सभी को बहरेपन की समस्या हो गई। ईएनटी विभाग में हुई जांच में सभी की सुनने की क्षमता स्थायी रूप से कम पाई गई। इसके बाद इनका इलाज किया जा रहा है।
मौजूद हैं दवाएं, समय रहते इलाज शुरू होने पर हो जाती है ठीक
केजीएमयू में संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. डी. हिमांशु ने बताया कि स्क्रब टायफस बीमारी के इलाज की दवाएं मौजूद हैं। इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। सही समय पर इलाज शुरू करने पर यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। यह बीमारी ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया से होने वाला एक संक्रामक रोग है। यह संक्रमित कीड़ों के काटने से होता है।
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स्क्रब टायफस के लक्षण
तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, काटने वाली जगह पर काले निशान के साथ लाल चकत्ते, सूखी खांसी, पेट दर्द, उल्टी, गंभीर मामलों में भ्रम, बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, लिवर, किडनी या दिमाग (मेनिन्जाइटिस, एन्सेफलाइटिस) को नुकसान।
ऐसे करें बचाव
झाड़ियों और घास वाली जगहों पर जाने से बचें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और शरीर को ढककर रखें, घर और आसपास चूहे न हों, इसका ध्यान रखें, डेंगू के लक्षण होने पर स्क्रब टायफस की भी जांच कराएं।
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