जिन मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट देने के बाद भी इसका सैचुरेशन मेंटेन नहीं होगा और वेंटिलेटर की आवश्यकता होगी तो उसे गंभीर रोगी के श्रेणी में माना जाएगा। वहीं, कैंसर, एचआईवी व अंग प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों को हर हाल में लेवल-टू या थ्री अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। ऐसे मरीजों को आईसीयू में रखा जाएगा।
घर-घर जाएगी रैपिड रिस्पांस टीम
नई गाइडलाइन में रैपिड रिस्पांस टीम को घर-घर जाकर होम आइसोलेशन वाले मरीजों की स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। जिन जिलों में सबसे कम मरीज होंगे, वहां तीसरे व सातवें दिन दोबारा टीम घर जाकर संबंधित मरीज के बारे में जानकारी लेगी।
वहीं, जिन जिलों में 100 से 200 नए केस मिल रहे हैं, वहां होम आइसोलेशन के तीसरे दिन रोगी की स्थिति का आकलन किया जाएगा। जबकि 200 से अधिक केस वाले जिलों में होम आइसोलेशन शुरू होने से दसवें दिन तक लगातार इंटीग्रेटेड कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से फोन के जरिए मरीज की स्थिति का आकलन किया जाएगा। यदि 10 दिन तक मरीज में किसी तरह का लक्ष्मण नहीं पाया गया तो उसे रिकवर्ड श्रेणी में माना जाएगा।