स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अधिकारियों पर अनियमित समायोजन करने का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि निदेशक (प्रशासन) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों के प्रोन्नति आदेश जारी किए थे।
इसके 48 घंटे के भीतर ही समायोजन के आदेश भी जारी कर दिए गए। जबकि कर्मचारियों ने अभी प्रभार प्रमाण पत्र भी नहीं दिया है।
स्वास्थ्य महानिदेशालय ने वरिष्ठ सहायक के पद पर समायोजन के लिए वर्ष 1997 तक कुल 900 कनिष्ठ सहायकों को पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया गया था।
जबकि महानिदेशालय ने महज 384 कनिष्ठ सहायकों की प्रान्नति की है। इससे 500 कनिष्ठ सहायक प्रोन्नति से वंचित रह गए हैं।
जबकि कर्मचारियों का कहना है कि महानिदेशालय ने विभिन्न कार्यालयों में पदों का विवरण लिए बिना समायोजन जारी कर दिया।
इससे कर्मचारियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विभिन्न कार्यालयों में पद रिक्त न होने के कारण कर्मचारियों का वेतन अधर में लटक गया है।
उनका कहना है कि प्रोन्नति आदेश में यह स्पष्ट उल्लेख होता है कि जब तक संबंधित कर्मचारी अपना प्रभार-प्रमाण पत्र भरकर प्रस्तुत न कर दे, तब तक प्रोन्नति प्रभावी नहीं होगी।
प्रभार प्रमाण-पत्र महानिदेशालय को अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। ऐसी दशा में कार्मिकों का समायोजन पूर्णत: अनुचित व नियम विरुद्ध है।