सूर्य की किरणों से भी हमें विटामिन-डी मिलता है। त्वचा में एर्गेंस्टरॉल नामक एक तत्व होता है, जो पराबैगनी किरणों के प्रभाव से विटामिन-डी में बदल जाता है। त्वचा सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों के संपर्क में आती है तो ये किरणें त्वचा में अवशोषित होकर विटामिन-डी का निर्माण करती हैं।
सप्ताह में दो बार 10 से 15 मिनट तक शरीर की खुली त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणें पड़ती हैं तो शरीर की विटामिन डी की 75 फीसदी आवश्यकता पूरी हो जाती हैं।
लोहिया संस्थान में विटामिन-डी पर आयोजित कार्यशाला में जेफरी मॉडल डायग्नोस्टिक सेंट यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के निदेशक डॉ. सुधीर गुप्ता ने ये जानकारी दी।
डॉ. सुधीर ने बताया कि विटामिन डी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को ठीक तरह से संचालित करने में मदद करता है और यह कैल्शियम को शरीर में संतुलित करने और हड्डियों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।
विटामिन डी गुर्दे, हृदय, आंत, हड्डियों, मस्तिष्क और नेत्रों के लिए बहुत आवश्यक है। इसकी कमी से संक्रमण, मधुमेह, गठिया, हृदय रोग की आशंका बढ़ जाती है। इस विटामिन का संबंध कैंसर के साथ भी देखा गया है।