गारद रूम का नजारा बहुत ही भयावह था। कमरे में चारों तरफ गोलियों के निशान थे। एके-47 में कुल 30 कारतूस की मैगजीन होती है। पुलिस ने रायफल की जांच की तो 13 कारतूस सुरक्षित मिल गए। एक कारतूस रायफल की नाल में फंसा था। रायफल से कुल 16 गोलियां चलीं और अरविंद की बाईं कनपटी से घुसकर दाईं तरफ से निकलीं। बाएं हाथ में छह गोलियां लगी थीं। एक गोली पेट व एक पैर में लगी थी। पूरे शरीर पर गोलियां लगने से खुदकुशी की बात किसी के गले से नहीं उतर रही है। पुलिस का भी कहना था कि अगर कोई खुदकुशी करेगा तो सिर, कनपटी या सीने में गोली मारेगा।
गारद कमांडर की थी रायफल
जिस एके-47 रायफल से गोलियां चली थीं, वह गारद रूम के गारद कमांडर अनिल कुमार की थी। वह रायफल गारद रूम में रखकर लघुशंका करने गया था। हालांकि, नियमत: अनिल को रायफल नहीं रखनी चाहिए थी। उसे अपनी रायफल किसी अन्य जवान के सुपुर्द करके लघुशंका के लिए जाना चाहिए था।
दुर्व्यवहार पर मिली थी सजा, मेस के घाटे को लेकर चल रही थी जांच
सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र के कमांडेंट श्याम चंद्र ने बताया कि अरविंद कुमार 13 सितंबर 2016 को लखनऊ आया था। कुछ दिन पूर्व दुर्व्यवहार का दोषी पाए जाने पर उसे दंडित किया गया था। इसके अलावा मेस में काफी घाटा हो रहा था, जिसकी जांच चल रही थी। हो सकता है कि वह तनाव में हो, इसलिए खुदकुशी कर ली हो। ग्रुप केंद्र के लोगों में यह भी चर्चा है कि रक्षाबंधन की छुट्टी को लेकर परिवार में कोई बात होने से उसने जान दे दी हो। विभागीय कर्मचारियों में यह भी चर्चा है कि अरविंद की एक अन्य जवान से किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी।