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सुना है क्या: 'सो रहा है एलआईयू' की कहानी, हवा-हवाई हुए सख्त आदेश; सकारात्मक राजनीति के किस्से

Sat, 18 Apr 2026 01:33 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'सो रहा है एलआईयू' की कहानी। इसके अलावा 'हवा-हवाई हुए सख्त आदेश' और 'सकारात्मक राजनीति का इरादा' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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सो रहा है एलआईयू

प्रदेश की औद्योगिक नगरी में हुए बवाल ने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी। इसकी आग भड़कने पर पड़ोसी मुल्क और राजधानी में बैठे खुराफाती तत्व सक्रिय हो गए लेकिन एलआईयू के अफसर सोते रहे। नतीजतन अफसरों को लाठी लेकर निकलना पड़ा। हैरानी की बात है कि अभी तक किसी को इसका जिम्मेदार नहीं माना गया है।

हमेशा की तरह अभयदान मिल गया। बवाल होने की सूचना कैसे नहीं मिली, यह सवाल कोई पूछ भी नहीं रहा। खैर, एलआईयू तो हर मौके पर ऐसे ही काम करती है। सुना है कि एक बड़े अफसर इससे खफा तो हैं लेकिन जिले के कुछ अफसरों के रसूख के डर से कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।

हवा-हवाई हुए सख्त आदेश

त्योहारों से लेकर महापुरुषों की जयंती पर कानून व्यवस्था बेहतर रखने के लिए लगातार सख्त आदेश जारी होते हैं। इस बार भी हुए। पुलिस कमिश्नर, एसएसपी, एसपी समेत रेंज और जोन के अफसरों को स्पष्ट निर्देश थे कि किसी भी तरह की घटना न हो पाए।

अगर होते हैं तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय होगी। हाल में एक महापुरुष की जयंती पर कई जिलों में बवाल हुआ। इन घटनाओं ने संबंधित जिलों के पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सारे सख्त आदेश हवा-हवाई हो गए।
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सकारात्मक राजनीति का इरादा

भैया ने सभी कार्यकर्ताओं से कह दिया है कि अब सकारात्मक राजनीति ही करनी है। अगर किसी की कोई बात नागवार लगे तो उसके कार्यक्रम में जाकर उसका विरोध मत करो बल्कि अलग से अपना कार्यक्रम करके उसके विरोध के तरीके निकालो। भैया ने भी महिला आरक्षण बिल का पहले ही दिन से सीधे विरोध नहीं किया, बल्कि कहा कि एससी-एसटी और ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण दो। नतीजतन, विरोध भैया के बजाय पुरानी पार्टी के भैया का ज्यादा हो रहा है।
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