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सुना है क्या: 'राज को राज रहने दो...' की कहानी, साथ ही 'चर्चा में पांच सितारा होटल की बैठक' के किस्से

Fri, 23 Oct 2026 04:53 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'राज को राज रहने दो...' की कहानी। इसके अलावा 'चर्चा में पांच सितारा होटल की बैठक' और 'जांच के डर से परेशान प्रोफेसर' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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राज को राज रहने दो...

हाईप्रोफाइल केस की आरोपी के राजधानी आते ही ब्यूरोक्रेसी में गजब का सन्नाटा पसर गया। सब चुपके से पता लगाने में जुट गए कि रास्ते से लेकर कोतवाली तक क्या-क्या राज उगले। कौन इकाना स्टेडियम में वीवीआईपी अरेंजमेंट कराता था। कार्यक्रमों में चीफ गेस्ट बनवाता था। 

किसके इशारे पर धमकियों की सुनामी आ जाती थी। हालांकि आरोपी को पहले से होमवर्क करा दिया गया था लिहाजा वह कानूनी तरीके से ही जुबान खोलने पर अड़ी रही। रास्ते में जो गुस्से में जाहिर किए राज जिन मोबाइल में कैद हुए, वह शायद ही कभी खुल पाएंगे। अब तो सबकी नजरें जेल में मिलने वाले ट्रीटमेंट पर हैं।

 

 

चर्चा में पांच सितारा होटल की बैठक

प्रदेश का शिक्षा विभाग आए दिन किसी न किसी चीज को लेकर चर्चा में बना रहता है। अब एमएलसी चुनाव के बीच राजधानी के पांच सितारा होटल में आयोजित एक बैठक ही खूब चर्चा में है।  केंद्रीय मंत्रालय की ओर से इस तरफ ध्यान न देकर बैठक तो आहूत कर ली लेकिन चुनाव को देखते हुए अचानक बैठक में और उसके मोड में बदलाव करना पड़ा। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अपने-अपने अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। फिलहाल यह बैठक चर्चा में है।

 

 
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जांच के डर से परेशान प्रोफेसर

प्रदेश के एक चिकित्सा संस्थान के कई प्रोफसरों को जांच का डर सता रहा है। वे शासन- सत्ता के गलियारे में टोह लेते नजर आ रहे हैं। शासन में पहुंचे एक प्रोफेसर यहां के अफसर से आगे क्या होगा, यह टोह ले नजर आए। वे यह जानना चाह रहे थे कि एक अफसर के इनकार के बाद दोबारा विभागीय जांच शुरू हो सकती है अथवा नहीं। इन्हें डर है कि जांच का दायरा आगे बढ़ा तो कहीं उनकी खुद की गर्दन न फंस जाए।
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