सुना है क्या... कॉलम में हम यूपी के सियासी और प्रशासनिक गलियारों की उन कानाफूसी का जिक्र करते हैं जो कि काफी छिपाने के बाद भी बाहर आ ही जाती हैं और बताती है कि अंदर चल क्या रहा है? आज हम प्रदेश सरकार के तीन विभागों की बात कर रहे हैं। पढ़ें, आज की कानाफूसी
सुना है क्या... कॉलम में हम यूपी के सियासी और प्रशासनिक गलियारों की उन कानाफूसी का जिक्र करते हैं जो कि काफी छिपाने के बाद भी बाहर आ ही जाती हैं और बताती है कि अंदर चल क्या रहा है? आज हम प्रदेश सरकार के तीन विभागों की बात कर रहे हैं। पढ़ें, आज की कानाफूसी...
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रील से डर रहे पूर्वांचल के शेर
सोशल मीडिया पूर्वांचल के शेरों से भरा हुआ है। जिसे देखो हथियारबंद लोगों और लग्जरी गाड़ियों के लश्कर के साथ अपना भौकाल जमा रहा है। माफिया से नेता का चोला ओढ़ने वालों को रायफलें दिखाकर गरीबों का रहनुमा बताया जा रहा है। नशीले सिरप के सिंडीकेट का खुलासा होते ही अब सबको सांप सूंघ गया है।
रील तो दूर सेल्फी भी खतरनाक लग रही है कि जाने कौन सी एजेंसी पीछे लग जाए। जिनको इसमें ज्यादा मजा आ रहा था, वे रोजाना सोशल मीडिया पर सिंडीकेट के साथ अपनी मिलीभगत की तस्वीरें देख परेशान हैं। दूसरी समस्या संरक्षण देने वालों के नजरें फेर लेने की भी है। सुना है कि अब कोई फोन भी नहीं उठा रहा।
टिकट की टेंशन और फोटो सेशन
साल 2017 की भगवा लहर में हाथी से उतरकर हाथ में कमल का फूल थामने वाले माननीय 2027 के टिकट के तनाव में हैं। बीच में मंत्री बनने का जुगाड़ लगाया था लेकिन बात नहीं बनी। नाराज होकर सरकार बड़ा या संगठन वाले विवाद में सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की।
ताजा विवाद ठेकेदारों से कमीशन को लेकर शुरू हुआ तो उनकी खासी किरकिरी हुई। संकेत मिला कि अगले चुनाव में टिकट से वंचित हो सकते हैं। इससे वह तनाव में आ गए हैं। लिहाजा दिल्ली के बड़े नेताओं को क्षेत्र के विकास के लिए पत्र देने के साथ फोटो खिंचवा कर सोशल मीडिया पर माहौल बनाने में जुटे हैं ताकि किसी तरह टिकट कटने का खतरा टल जाए।
इन दिनों दो महिला नौकरशाह बाहर से एकदूसरे के प्रति बड़ा ही बहनापा दिखा रही हैं। बैठकों में ऐसे दिखाती हैं मानो एकदूसरे से बड़े मधुर रिश्ते हों लेकिन अंदर ही अंदर अलग खिचड़ी पक रही है। बताते हैं कि एक महिला नौकरशाह कुछ फाइलें पास करवाना चाहती हैं लेकिन दूसरी इसके लिए तैयार नहीं हैं। अब देखते हैं कि इस बहनापे का घड़ा कब फूटता है?