माननीय को भारी पड़ गया उड़ता तीर
नौकरशाही छोड़ सियासत में उतरे माननीय को उड़ता तीर पकड़ना भारी पड़ गया। दरअसल माननीय अपने गृह जिले की अपनी जाति की बहुलता वाली सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। लिहाजा अपनी ही जाति के एक पूर्व सांसद पर आरोप लगा माहौल बनाने की कवायद करने लगे।
उनका यह दांव उल्टा पड़ गया, क्योंकि सत्ता में प्रभावशाली पदों पर रहकर माननीय ने गृह जिले के लिए कुछ नहीं किया। क्षेत्रीय लोगों से दूरी बनाए रहे। वहीं पूर्व होने के बाद भी सांसद की फैन फॉलोविंग अधिक है। ऐसे में माननीय के बयानों का उनकी ही जाति के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। माहौल बिगड़ता देख माननीय ने चुप्पी साध ली है।
तेरे दर पर चले आए
कमीशनखोरी के आरोपों से घिरे एक ब्यूरोक्रेट अपनी जमीन बचाने को लोकभवन के चक्कर काटते दिख रहे हैं। उन्होंने अपनी अपील और दलील के लिए एक प्रभावशाली अफसर का दामन थाम रखा है। अक्सर उनके कमरे में बैठे हुए नजर आते हैं। आने-जाने वाले भी इसे देखकर हैरान हैं कि जिसके खिलाफ जांच की अनुमति दी जानी है, वह खुल्लम-खुल्ला पैरवी में जुटा है। ब्यूरोक्रेट को भी बखूबी पता है कि दो वरिष्ठों की लड़ाई में हुए उसके नुकसान की भरपाई किसके दर से दरबार तक हो सकती है।
एसआईआर में एक्स-एल शीट
एसआईआर में एक्स-एल शीट को लिखकर विपक्ष इन दिनों खूब हो-हल्ला कर रहा है। दरअसल पश्चिम में तैनात एक कमिश्नर ने प्रचारित कर दिया कि ऊपर से एक्स-एल शीट आई है, इसमें पूछा जा रहा है कि कौन डीएम एसआईआर में रुचि ले रहे हैं और कौन नहीं।
यह भी बताया कि पूछने वाला अहम जगह पर बैठा एक सीनियर आईएएस अफसर ही है। फिर क्या था? विपक्ष भी सक्रिय हो गया, अपने तरकश के तीर लेकर कि सीनियर आईएएस को ठेका दिया गया वोट काटने का। अब देखते हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है।