झांसे का अलाउंस
यूं तो एक महकमे में तबादले के लिए 30 जून तक का समय है, लेकिन ऊपर से तय हो गया है कि कार्मिकों को ज्यादा डिस्टर्ब करना ठीक नहीं। जो जहां अच्छा काम कर रहा है, उसे करने दिया जाए। अगर परफॉर्मेंस ठीक नहीं है तो तबादला सीजन का क्या इंतजार करना, तत्काल हटा दिया जाए। पता चला है कि इन गुप्त निर्देशों की भनक यूनियन के कुछ असरदार लोगों को भी लग गई है। वे कार्मिकों को झांसा दे रहे हैं कि उनका तबादला नहीं होने देंगे। इसके एवज में नॉन डिस्टर्बिंग अलाउंस भी तय किया जा रहा है।
ग्लोबल पर भारी देसी
हजारों करोड़ के ई उपकरण खरीद की चर्चा ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में जमकर तैर रही है। आर्डर किसे मिले, कैसे मिले, क्या जोड़तोड़ किया गया...दबे मुंह हर सरकारी इमारत में गॉसिप चल रहा है। बताया जा रहा है कि इस टेंडर को पाने में दिग्गज ग्लोबल कंपनियां दौड़ में हैं लेकिन चर्चा है कि फिलहाल रेस में सबसे आगे पश्चिम यूपी की देसी कंपनी है। इसे लेकर सभी अचरज में हैं। फिलहाल आर्डर की मलाई कौन खाएगा, ये फाइनल नहीं है लेकिन अचार की तरह चटखारों का मजा जोरों पर है।
मुरझा गए गुलदस्ते, रखा रहा केक
प्रदेश के एक प्रमुख विभाग के अधिकारियों को हाल में काफी निराशा हाथ लगी है। दरअसल, विभाग के माननीय का जन्मदिन था और उनको उम्मीद थी कि इस दिन माननीय अपने गृह क्षेत्र से राजधानी आएंगे। फिर क्या था कहीं बड़े-बड़े गुलदस्ते तैयार कराए गए थे तो कहीं बड़े-बड़े केक भी। शाम को माननीय से मिलने की ब्रेसब्री भी थी। किंतु शाम होने ही सबकी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। क्योंकि चुनावी साल में माननीय ने अपने क्षेत्र में रहने को प्राथमिकता दी। ऐसे में गुलदस्ते मुरझा गए और केक भी दुकान में ही रखा रह गया।