साइकिल! न बाबा न
पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर सड़क पर दिख रहा है। एक तरफ माननीय कार से साइकिल पर आ गए हैं तो दूसरी तरफ साहबों को साइकिल से डर लग रहा है। इसकी वजह सेहत नहीं बल्कि चुनाव चिह्न है। पिछले दिनों ब्यूरोक्रेसी भवन में साइकिल की सवारी पर बड़े-बड़े साहब चर्चा में लीन थे।
मंथन चल रहा था कि कौन कब साइकिल खरीदेगा? तभी एक कद्दावर साहब बोले...चाहे जो हो जाए, मैं साइकिल की सवारी नहीं करूंगा। काहे... जवाब मिला... नौ साल पहले साइकिल चलाना छोड़ दिया। इस पर ठहाके लग गए।
इसमें भी चाहिए महिला आरक्षण
देश-प्रदेश में बच्चों का भविष्य गढ़ने वाले गुरुजी लोग आज कल एक सुप्रीम आदेश से परेशान हैं। वे इसके लिए सड़क से सदन तक लड़ रहे हैं। वहीं, हाल ही में बड़ी अदालत में उस समय कुछ शिक्षक असहज हो गए, जब उनके ही बीच से महिला गुरुजी को विशेष राहत की मांग उठा दी।
इस पर चुटकी लेते हुए एक गुरुजी ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि इसमें भी चाहिए महिला आरक्षण। कम से कम यहां पर तो सबके हित की बात उठानी चाहिए थी। इस पर काफी गुरुजनों ने खूब चुटकी ली है।