सहमे-सहमे से बाहुबली
सूबे के एक पूर्व माननीय अपने बाहुबल के लिए कई राज्यों में मशहूर हैं। कई कांडों के बाद बीते दिनों कफ सिरप मामले में भी उनका नाम उछला था। उस मुसीबत से तो किसी तरह बच गए, लेकिन अब दूसरे राज्य की पुलिस के रडार पर आ गए। इसके बाद ऐसी शामत आई कि भूमिगत होना ही ठीक लगा। अब लंबे समय बाद उनकी सक्रियता फिर बढ़ी है। जरूर फिर कुछ मैनेजमेंट किया होगा। किसी ने खूब कहा है, 'बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी, कभी तो शामत आएगी'...
ऐन समय पर साहब गायब
प्रदेश में युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार करने वाले एक विभाग में आजकल खूब हंगामा मचा हुआ है। आए दिन प्रशिक्षण देने वाले अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। खास बात यह है कि उनकी समस्याओं के समाधान की जगह विभाग के मुखिया साहब ही गायब हो जा रहे हैं। चर्चा है कि ऊपर के कड़े निर्देश के बावजूद साहब अपनी मनमानी पर अड़े हैं। हालत यह है कि उनके चक्कर में जब बड़े साहब घिर गए तो उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए वार्ता का समय तय कर दिया। ऐसे में अब साहब कैसे गायब होंगे?
आने से ज्यादा जाने वाले
बड़े-बड़े शहरों में बड़े लोगों के कारोबारी दुख हरने के लिए मोटे पैकेज पर थोक में भर्तियां की गई हैं। उनका काम कारोबारियों के लिए 'संकटमोचक' की भूमिका निभाना है। काम भी कर रहे हैं, लेकिन विभाग में आयातित एक साहब उन्हें 'बंधुआ मजदूर' समझ बैठे।
सुबह से देर रात तक काम और सिर्फ काम... संडे हो या मंडे... काम ही काम। जो न आए, उसके साथ मदर इंडिया के सुक्खी लाला जैसा बर्ताव। बाहर से आए साहब से त्रस्त युवा नौकरी छोड़ रहे हैं। एक तरफ भर्तियां हो रही हैं तो दूसरी ओर पुराने कम होते जा रहे हैं।