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सुना है क्या: "अपना हिस्सा मांगने पर हुई जूतम-पैजार", "पीआर में भी आपस में रार", "खेल में परिवार की वापसी"

Fri, 11 Sep 2026 02:32 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यूपी के एक चिकित्सा संस्थान में सीनियर व जूनियर के बीच हिस्से के बंटवारे को लेकर जूतम-पैजार हो गई। हिदायत दी गई कि मामला संभला तो ही हिस्सा मिलेगा। वहीं, पीआर में भी रार छिड़ गई तो चर्चा है कि अब विभाग के कामकाज का प्रसार कैसे होगा। पढ़ें आज के किस्से:
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के एक चिकित्सा संस्थान में सीनियर व जूनियर के बीच हिस्से के बंटवारे को लेकर जूतम-पैजार हो गई। हिदायत दी गई कि मामला संभला तो ही हिस्सा मिलेगा। वहीं, पीआर में भी रार छिड़ गई तो चर्चा है कि अब विभाग के कामकाज का प्रसार कैसे होगा। वहीं, खेल एसोसिएशन में परिवारों की वापसी चर्चा में बनी हुई है। पढ़ें आज के किस्से: 

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चिकित्सा संस्थान में जूतम-पैजार
सेहत महकमे से जुड़े एक विभाग में ठेकेदारी को लेकर दो दिन पहले जमकर विवाद हुआ। विभाग के आला अफसर के चैंबर में घुसे जूनियर ने पहले अपना हिस्सा मांगा। हिस्सा देने में कोताही हुई तो जूतम-पैजार शुरू हो गई। मामला मुखिया के पास पहुंचा तो उनके आर्थिक सलाहकार ने दोनों पक्षों को समझाया और चेतावनी दी कि यह बात बाहर नहीं जानी चाहिए, वर्ना हिस्सा नहीं मिलेगा। संभल गई तो जिसका जितना हक, उसे मिल जाएगा। लेकिन यह बात बाहर जा चुकी है। अब देखना है कि जिस बात को लेकर जूतम-पैजार हुई, उसका समाधान क्या निकलता है।

पीआर में भी आपस में रार
प्रदेश में एक माननीय के विभागीय कामकाज के प्रचार-प्रसार के लिए अन्य की तरह प्रचार संस्थाएं काम कर रही हैं। अब माननीय के पास दो विभाग हैं तो इसके लिए अलग-अलग लोग भी हैं। हालात यह हैं कि पीआर में भी रार छिड़ गई है। माननीय ने हाल में दोनों विभागों की एक साथ बैठक की। इसके बाद दोनों ने अपने-अपने विभाग से जुड़ी जानकारी अलग-अलग जारी की। यह विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब पीआर में ही रार है तो विभाग का प्रचार-प्रसार कैसे होगा।
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खेल के मैदान में परिवार की पारी
प्रदेश की चार-पांच खेल एसोसिएशन में खेल से ज्यादा परिवारवाद की चर्चा है। कहीं पिता-पुत्र, कहीं पति-पत्नी तो कहीं चाचा-भतीजे की जोड़ी कुर्सियों पर जमी है। विरोध हुआ तो किसी को बाहर किया तो किसी की सक्रियता पर ब्रेक लगाने की चर्चा आम है। अब खेल विधेयक लागू होने की सुगबुगाहट ने वर्षों से जमी एक बड़ी एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बेचैनी बढ़ा दी है। डर है कि नए नियम कहीं उनकी 'पारिवारिक पारी' पर फुलस्टॉप न लगा दें। लिहाजा सत्ता बचाने के लिए अभी से नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। मैदान में खेल भले बदले, मगर कुर्सी की पारी रुकनी नहीं चाहिए।
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