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सुना है क्या: खुन्नसी मैडम नौकरशाह की कहानी, साहब के कारखास लेखाकार; 'यहां भी तलाश लिया पीडीए' के किस्से

Sat, 07 Mar 2026 11:26 AM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'खुन्नसी मैडम नौकरशाह' की कहानी। इसके अलावा 'साहब के कारखास लेखाकार' और 'यहां भी तलाश लिया पीडीए...' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी... 

खुन्नसी मैडम नौकरशाह

मैडम नौकरशाह को उनके मातहत बड़ी ही खुन्नसी बता रहे हैं। जिससे नाराज, उसे कड़ा दंड दिलवा दे रही हैं। वहीं जिससे खुश, उसके लिए उनसी ओर से सौ खून माफ। एक मातहत अधिकारी को सभी के सभी आरोपों में दोषी तो दूसरे को सभी के सभी आरोपों में दोष मुक्ति। एक मामले में तो मंत्रीजी ने भी लिखा कि सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए, लेकिन हुआ वही जो मंजूर मैडम नौकरशाह को था। हालांकि, कुछ मातहत मैडम नौकरशाह का भी कच्चा चिट्ठा इकट्ठा कर रहे हैं।

साहब के कारखास लेखाकार

गांवो के विकास वाले महकमे के मुख्यालय में फंड मैनेजमेंट देखने वाले लेखाकार के जलवे की चर्चा खूब है। वर्षो से मुख्यालय में जमे और गंभीर वित्तीय शिकायतों से घिरे लेखाकार का पिछले जून में ही तबादला प्रयागराज में उच्च शिक्षा निदेशालय में हुआ था, लेकिन वह नहीं गए। 

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शासन ने सख्ती की तो नवंबर में कागज पर रिलीव तो हो गए पर "कागज पर बीमार " होकर राजधानी में ही डटे हैं। कागजी बीमारी से ग्रस्त लेखाकार साहब अक्सर मुख्यालय आते हैं और महकमे का फंड मैनेजमेंट को अंजाम देते हैं। अब महकमे में लेखाकार साहब को लोग बड़े साहब के "कारखास" के नाम से भी बुलाने लगे हैं। हालांकि ये मामला ऊपर तक पहुंच गया है। सुना है कि जल्द ही कार्रवाई होने वाली है।

यहां भी तलाश लिया पीडीए...

होली के रंगों के बाद क्रिकेट के वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल के रंगों से कुछ नौकरशाह इस कदर सराबोर दिखे कि उसमें भी पीडीए का एंगल तलाश लिया। टीम को जिताने के लिए विकेट लेने और कैच दबोचने वालों में भी पीडीए की भूमिका पर खास निगाहें रहीं।

दिमागी घोड़े कुछ इस कदर दौड़े कि मैच को आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजों से जोड़कर नए समीकरण गढ़ने से भी नहीं चूके। भला हो कि यह सब एक बंद कमरे में कुछ खास के बीच हुआ। हालांकि इसकी चर्चा जरूर कुछ लोगों ने सुन ली, जो अब रायता फैलाने में कोई कसर नहीं बाकी रख रहे।

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