शिकायतों का सिलसिला
जो विभाग बजट के मामले में पिछले कुछ वर्षों में पीडब्लूडी को टक्कर देने लग गया हो, उसे हल्का-फुल्का मानने की भूल न करें। इसी विभाग ने हाल में अपनी ताकत और रसूख साबित कर दिया। अंदरखाने चर्चा है कि ये टकराव नौकरशाही बनाम माननीय के बीच का परिणाम है।
नौकरशाही ने काम में अड़ंगा डालने की शिकायत ऊपर तक की थी और लगातार की जा रही थी। फिर लेनदेन की कानाफूसी कर दी गई। फिर क्या था...बेहद खामोशी और सफाई से अधिकारों में कटौती हो गई लेकिन दिलचस्प बात ये है कि संबंधित शासनादेश 11 दिन बाद वायरल हुआ। ऐसा क्यों... इसकी छानबीन भी जारी है।
जाने के बाद भी चर्चा में हैं साहब
प्रदेश में पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में तबादले पिछले साल से चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस साल एक साहब की सेवानिवृत्ति और तबादलों की डेडलाइन एक साथ पूरी हुई। ऐसे में साहब के समय में हुए तबादलों को लेकर शिक्षक संगठन भी लग गए हैं। उनका कहना है कि जाते-जाते साहब ने कुछ खास लोगों को उपकृत कर दिया है। इसके बाद खुद बड़ी लंबी यात्रा पर चले गए हैं। अब विभाग में ऊपर से लेकर नीचे तक साहब के समय हुए तबादलों को लेकर काफी चर्चा छिड़ी हुई है।
किसकी गर्दन पर पड़ेगा फंदा
फल-फूल वाले विभाग में इन दिनों अनुदान को लेकर घमासान मचा है। पिछले साल उपकरणों पर अनुदान में खेल हो गया है। यह मामला प्रदेश के मुखिया के पास पहुंच गया है। ऐसे में अब विभाग में किसकी गर्दन पर फंदा डाला जाए, इसके लिए खोजबीन शुरू हो गई है। सप्ताह भर से चल रहा यह मिशन अभी तक मुख्यालय में पूरा नहीं हो पाया है। अब देखना यह है कि यह मिशन पूरा होता है अथवा मिशन की जिम्मेदारी संभालने वाले की ही गर्दन फंसती है।