फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुना है क्या: घोटाले के मास्टरमाइंड पर बरसेगी कृपा, फर्क तो पड़ता है; असली पापों से मुक्ति की कहानी

Sat, 30 May 2026 03:45 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास..
विज्ञापन
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'तबादले पर पहरा' की कहानी। इसके अलावा 'रोमांचक हुई बड़ी कुर्सी की जंग' और 'कारखास फिर सक्रिय' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

विज्ञापन

घोटाले के मास्टरमाइंड पर बरसेगी कृपा

गांवों के विकास वाले महकमे में इन दिनों दागियों पर साहब की खूब नजर-ए-इनायत है। ऐसे ही एक दागी बर्खास्त एपीओ की महकमे में वापसी की खूब चर्चा है। ये वही एपीओ हैं, जो मुख्यालय में तैनात रहे थे और कुछ साल पहले 1.50 करोड़ से अधिक के मनरेगा घोटाले में शासन ने बर्खास्त कर दिया था। 

चर्चा है कि इन्होंने फिर से वापसी की सेटिंग की है। बताया जा रहा है कि बर्खास्त एपीओ राज्य मनरेगा प्रकोष्ठ में कार्यरत अपने पुराने साथियों के सहारे दोबारा मनरेगा सेल में वापसी की तैयारी में जुटे हैं। फाइल तैयार हो गईं है। अब देखना यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कितना अमल होता है।

 

फर्क तो पड़ता है...

यूं तो अवैध कटान और उससे मिली लकड़ी स्टोर किए जाने का इनपुट अक्सर ही विभाग को दिया जाता रहा, लेकिन हर बार मौके पर अधिकारी जाते और रिपोर्ट दे देते कि मौके पर कुछ नहीं मिला। मिलीभगत के चलते सही सूचना को ही झुठला दिया जाता। इस बार इनपुट सीधे उच्चस्तर पर पहुंच गया। 

ऐसी मॉनीटरिंग हुई कि मन मसोसकर ही सही, पर कार्रवाई करनी पड़ी। इसके बावजूद कि अवैध कटान करने वालों के वाट्सएप ग्रुप में सूचना लीक कर दी गई थी, अवैध कारोबारी अपने मंसूबे में सफल नहीं हुए। अब उन्हें बचाने की कई युक्तियां भी निकाली जा रही हैं।

 

विज्ञापन

असली पापों से मुक्ति

सूबे का एक कमिश्नरेट मोक्ष पाने के लिए दुनिया भर में मशहूर है। हालांकि मोक्ष पाने की जगह तमाम लोग ऐश करने भी वहां पहुंच जाते हैं। ऐसे में कमिश्नरेट पुलिस ने उनको भी पापों से मुक्त करने की कवायद तेज की है। ऐसे लोगों को सलाखों के पीछे भेजकर पावन नगरी को पापमुक्त किया जा रहा है। 

उन पर भी शिकंजा कसा जा रहा है, जिन्होंने भक्ति वाले शहर में नशे के बीज बोने शुरू किए हैं। यही हाल रहा तो बाकी कमिश्नरेट को भी इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा क्योंकि यह बीमारी सब जगह फैल रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें